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राज्य पुरस्कार दौड़ में पिछड़ रहे कुल्लू-लाहौल के शिक्षक
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कुल्लू। अध्यापक दिवस पर राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार की दौड़ में कुल्लू व लाहौल-स्पीति जिले के शिक्षक पिछड़ रहे हैं। वर्ष 2015 के बाद कुल्लू और लाहौल-स्पीति से महज एक-एक शिक्षक को ही राज्य स्तरीय अवार्ड मिला है।
राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए इस बार भी दोनों जिलों से एक भी शिक्षक का चयन नहीं हुआ है। ऐसे में दोनों जिलों के शिक्षकों पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि जिला कुल्लू से इस बार महज दो शिक्षकों ने आवेदन किया था। लेकिन दोनों मानकों पर खरे नहीं उतर पाए। ऐसे में उनका चयन राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए नहीं हो पाया। इस बार कुल्लू व लाहौल-स्पीति से एक भी शिक्षक अवार्ड के लिए चयनित नहीं हुआ है। किन्नौर जिले के हाथ भी निराशा लगी है। अन्य जिलों के शिक्षक शिमला में वीरवार को शिक्षक दिवस पर राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित होंगे। वर्ष 2017 में कुल्लू जिले के निरमंड में प्राइमरी स्कूल चिल्लागे के शिक्षक हरीचंद को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार दिया गया था। दो सालों से कुल्लू को कोई अवार्ड नहीं मिला। लाहौल-स्पीति की बात करें तो यहां पर भी वर्ष 2018 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला उदयपुर के प्रधानाचार्य रहे सुरेश विद्यार्थी को बेहतर शैक्षणिक कार्य के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा गया था। सुरेश विद्यार्थी ने बतौर प्रधानाचार्य अपने कार्यकाल में स्कूल का रिजल्ट 100 फीसदी दिया, जिसके लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया। इस बार स्टेट अवार्ड के नामों की घोषणा हो चुकी है। इसमें कुल्लू और लाहौल-स्पीति का एक भी नाम नहीं है। ऐसे में लोगों ने दोनों जिलों के शिक्षकों पर कई तरह के सवाल खड़े किए हैं। लोगों का मानना है कि अवार्ड में पिछड़ने का मतलब है कि या तो शिक्षक इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहे या फिर शिक्षक मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। बहरहाल राज्य स्तरीय शिक्षक अवार्ड में कुल्लू, लाहौल के पिछड़ने को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
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राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए इस बार भी दोनों जिलों से एक भी शिक्षक का चयन नहीं हुआ है। ऐसे में दोनों जिलों के शिक्षकों पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि जिला कुल्लू से इस बार महज दो शिक्षकों ने आवेदन किया था। लेकिन दोनों मानकों पर खरे नहीं उतर पाए। ऐसे में उनका चयन राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए नहीं हो पाया। इस बार कुल्लू व लाहौल-स्पीति से एक भी शिक्षक अवार्ड के लिए चयनित नहीं हुआ है। किन्नौर जिले के हाथ भी निराशा लगी है। अन्य जिलों के शिक्षक शिमला में वीरवार को शिक्षक दिवस पर राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित होंगे। वर्ष 2017 में कुल्लू जिले के निरमंड में प्राइमरी स्कूल चिल्लागे के शिक्षक हरीचंद को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार दिया गया था। दो सालों से कुल्लू को कोई अवार्ड नहीं मिला। लाहौल-स्पीति की बात करें तो यहां पर भी वर्ष 2018 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला उदयपुर के प्रधानाचार्य रहे सुरेश विद्यार्थी को बेहतर शैक्षणिक कार्य के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा गया था। सुरेश विद्यार्थी ने बतौर प्रधानाचार्य अपने कार्यकाल में स्कूल का रिजल्ट 100 फीसदी दिया, जिसके लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया। इस बार स्टेट अवार्ड के नामों की घोषणा हो चुकी है। इसमें कुल्लू और लाहौल-स्पीति का एक भी नाम नहीं है। ऐसे में लोगों ने दोनों जिलों के शिक्षकों पर कई तरह के सवाल खड़े किए हैं। लोगों का मानना है कि अवार्ड में पिछड़ने का मतलब है कि या तो शिक्षक इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहे या फिर शिक्षक मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। बहरहाल राज्य स्तरीय शिक्षक अवार्ड में कुल्लू, लाहौल के पिछड़ने को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
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