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50 हजार की जगह आठ हजार सेब पेटियों का उत्पादन
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भुंतर सब्जी मंडी में सेब लेकर पहुंचे बागवान।
- फोटो : Kullu
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कुल्लू। आनी की रघुुपुर घाटी के बागवानों को मौसम ने बड़ा झटका दिया है। क्षेत्र की चार पंचायतों के सैकड़ों लोग बागवानी पर निर्भर हैं। साल कोरोना काल में बागवानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ा है। खराब मौसम के कारण इस बार 30 हजार की जगह मात्र सात से आठ हजार सेब पेटियों का ही उत्पादन हो पाया है।
कई जगह तो बागवान सेब को मंडियों में भेजना तो दूर खुद को खाने के लिए भी नहीं है। घाटी में लगातार मौसम की मार से बागवानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। इस साल मार्च माह में बर्फबारी के साथ पड़ी ठंड से फ्लावरिंग और सेटिंग खराब हो गई। अप्रैल और मई माह में लगातार ओलावृष्टि और अंधड़ से सेब की फसल तबाह हो गई। पांच से छह बार गिरे भारी ओले से सेब के दानों के साथ पतों के भी ढेर लग गए। बागवान रमेश ठाकुर, हीरा लाल, ध्यान सिंह, प्रताप सिंह, हंस राज, किशोरी लाल, राजू राठौर तथा सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि पहली बार पूरी रघुपुर घाटी के सेब की पैदावार में भारी गिरावट आई है।
उन्होंने कहा कि मौसम की मार से करीब 90 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। घाटी में जिस बागवान के 500 पेटियां होती थीँ उसकी मात्र 50 पेटियों का उत्पादन हो पाया है। उन्होंने कहा कि घाटी के लोगों की मुख्य आजीविका बागवानी है। साल दर साल सेब का दायरा बढ़ रहा है। मौसम की मार से उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बेली राम और आलम चंद का कहना है कि कोरोना काल में में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। खासकर लगौटी, टकरासी, करशैईगाड़ और फनौटी पंचायत के बनाला, करशाला, कोलथा, बालू, लोट, कुआ, छलाच, कोट, कमांद, ढरेच, सुहल, फनौटी, जुहड़ और डोहाड़ गांव के बागवानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
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बागवानी विभाग कुल्लू के अधिकारी उत्तम पराशर ने कहा कि इस साल जिले में सेब का उत्पादन पिछले साल से भी कम है। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि और अंधड़ से सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
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कई जगह तो बागवान सेब को मंडियों में भेजना तो दूर खुद को खाने के लिए भी नहीं है। घाटी में लगातार मौसम की मार से बागवानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। इस साल मार्च माह में बर्फबारी के साथ पड़ी ठंड से फ्लावरिंग और सेटिंग खराब हो गई। अप्रैल और मई माह में लगातार ओलावृष्टि और अंधड़ से सेब की फसल तबाह हो गई। पांच से छह बार गिरे भारी ओले से सेब के दानों के साथ पतों के भी ढेर लग गए। बागवान रमेश ठाकुर, हीरा लाल, ध्यान सिंह, प्रताप सिंह, हंस राज, किशोरी लाल, राजू राठौर तथा सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि पहली बार पूरी रघुपुर घाटी के सेब की पैदावार में भारी गिरावट आई है।
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उन्होंने कहा कि मौसम की मार से करीब 90 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। घाटी में जिस बागवान के 500 पेटियां होती थीँ उसकी मात्र 50 पेटियों का उत्पादन हो पाया है। उन्होंने कहा कि घाटी के लोगों की मुख्य आजीविका बागवानी है। साल दर साल सेब का दायरा बढ़ रहा है। मौसम की मार से उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बेली राम और आलम चंद का कहना है कि कोरोना काल में में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। खासकर लगौटी, टकरासी, करशैईगाड़ और फनौटी पंचायत के बनाला, करशाला, कोलथा, बालू, लोट, कुआ, छलाच, कोट, कमांद, ढरेच, सुहल, फनौटी, जुहड़ और डोहाड़ गांव के बागवानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
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बागवानी विभाग कुल्लू के अधिकारी उत्तम पराशर ने कहा कि इस साल जिले में सेब का उत्पादन पिछले साल से भी कम है। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि और अंधड़ से सबसे अधिक नुकसान हुआ है।