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Kullu News: गड़सा घाटी में उमड़ा आस्था का जन सैलाब
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शौठ निहारगड़ू महाराज के पवित्र झरने में श्रद्धालुओं ने किया स्नान
संवाद न्यूज एजेंसी
भुंतर (कुल्लू)। 20 भाद्रपद के पावन अवसर पर जिले की गड़सा घाटी स्थित देवता शौठ निहारगड़ू महाराज के ऐतिहासिक तीर्थस्थल पर आस्था का सैलाब उमड़ा। देवता के पवित्र झरने में स्नान के लिए प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पवित्र जल में स्नान कर देवता शौठ निहारगड़ू महाराज के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।
भुंतर निवासी डॉ. सूरत ठाकुर ने बताया कि कुल्लू में 20 भादो के स्नान की प्राचीन, धार्मिक और लोक परंपरा है। मान्यता है कि मानसून के दौरान पहाड़ों में उगने वाली दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों का रस पानी के स्रोतों में मिल जाता है। 20 भादो के दिन इनका प्रभाव सबसे अधिक माना जाता है। इसी कारण पवित्र झरनों, सरोवरों और नदी संगमों में स्नान करने की परंपरा चली आ रही है। लोक मान्यता के अनुसार, इन पवित्र जल स्रोतों में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों सहित विभिन्न शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने बताया कि कुछ वर्षों से इन पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इन स्थानों की पवित्रता और प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
भुंतर (कुल्लू)। 20 भाद्रपद के पावन अवसर पर जिले की गड़सा घाटी स्थित देवता शौठ निहारगड़ू महाराज के ऐतिहासिक तीर्थस्थल पर आस्था का सैलाब उमड़ा। देवता के पवित्र झरने में स्नान के लिए प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पवित्र जल में स्नान कर देवता शौठ निहारगड़ू महाराज के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।
भुंतर निवासी डॉ. सूरत ठाकुर ने बताया कि कुल्लू में 20 भादो के स्नान की प्राचीन, धार्मिक और लोक परंपरा है। मान्यता है कि मानसून के दौरान पहाड़ों में उगने वाली दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों का रस पानी के स्रोतों में मिल जाता है। 20 भादो के दिन इनका प्रभाव सबसे अधिक माना जाता है। इसी कारण पवित्र झरनों, सरोवरों और नदी संगमों में स्नान करने की परंपरा चली आ रही है। लोक मान्यता के अनुसार, इन पवित्र जल स्रोतों में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों सहित विभिन्न शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने बताया कि कुछ वर्षों से इन पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इन स्थानों की पवित्रता और प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। संवाद
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