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देव यात्रा पर नहीं दी जाएगी पशु बलि
Kullu
Updated Tue, 21 Oct 2014 05:33 AM IST
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। पशु बलि की बजाए नारियल से ही अधिष्ठाता देव राजा घेपन की यात्रा पूरी होगी। रविवार से लाहौल घाटी के अधिष्ठाता देव राजा घेपन की करीब दो माह लंबी यात्रा शुरू हो गई। सदियों से चली आ रही परंपरा को छोड़ कर ऐसा पहली बार हो रहा है, जब बिना पशु बलि के राजा घेपन अपनी यात्रा पूरी करेंगे। मंदिर कमेटी के इस निर्णय से जिला प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। गौंधला के समीप गुंचलिंग में देव समागम में राजा घेपन मंदिर कमेटी ने कोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हुए पशु बलि की सदियों पुरानी परंपरा को बंद करने का ऐलान किया है। इसका धार्मिक संगठनों के साथ ही घाटी की जनता और पंचायत प्रतिनिधियों ने स्वागत किया है। तीन साल बाद अपने देवालय से निकल कर राजा घेेपन लाहौल घाटी के भ्रमण पर निकल पडे़ हैं। मान्यता है कि इस दौरान राजा घेपन लोगों की दुख तकलीफों को दूर करने के अलावा आने वाले तीन वर्ष तक की भविष्यवाणी करते हैं, जिसे गूर के माध्यम से आम जन तक पहुंचाया जाता है। गुंचलिंग में रविवार को गौंधला घाटी के देवी-देवताओं से विदाई लेकर राजा घेपन और देवी भोटी ने अपनी दो माह की लंबी यात्रा का श्रीगणेश कर लिया है। अधिष्ठाता देव राजा घेपन के स्वागत और सत्कार के लिए गांव-गांव में तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर कमेटी के प्रधान पूर्णचंद ने बताया कि हाईकोर्ट के हिमाचल में सार्वजनिक स्थलों पर पशु के रोक पर आए फैसले का सम्मान करते हुए राजा घेपन की यात्रा के दौरान पशु बलि नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पशु बलि की बजाए नारियल देकर धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए जाएंगे। इधर, लाहौल पंचायत प्रधान संघ के अध्यक्ष वीर सिंह ने कहा कि मंदिर कमेटी के इस निर्णय का वह सभी स्वागत करते हैं। उन्होंनेे कहा कि राजा घेपन की यात्रा के दौरान पशु बलि नहीं लिए जाने से न्यायालय के फैसले का सम्मान किया गया है।
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