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विश्व धरोहर की दौड़ में जीएचएनपी
Kullu
Updated Tue, 13 May 2014 05:31 AM IST
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कुल्लू। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क लगातार दूसरी बार नए सिरे से विश्व धरोहर बनने की प्रतिस्पर्धा में शामिल हो गया है। कंबोडिया में मिली असफलता की भरपाई कतर की राजधानी दोहा में करने को पार्क प्रबंधन ने कमर कसी है। जून के मध्य यूनेस्को में होने वाली मीटिंग में नए सिरे से पार्क की फाइल रखी जाएगी।
जीव-जंतुओं की रक्षा को अभ्यारण्य बना कुल्लू जिले का ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क अब सूबे का सबसे बड़ा पार्क बन गया है। प्रदेश सरकार ने इंटेंशन कर नोटिफिकेशन कर पार्क के दायरे को 906 वर्ग किलोमीटर कर दिया है। पूर्व में इसका क्षेत्रफल 754.4 वर्ग किलोमीटर था। अब पार्क प्रबंधन ने सैंज के 61 तथा तीर्थन सेंक्चुरी के 91 वर्ग किमी को इसमें शामिल किया है। 265 वर्ग किलोमीटर का इको जोन क्षेत्र भी इसमें शामिल है। इसे लोगों के हक-हकूकों के चलते अभी बाहर रखा है। पार्क की जैव विविधता को देखते हुए इसे वर्ल्ड हेरिटेज बनाने की सूची में शामिल किया है। यूनाइटेड नेशंस एजूकेशनल साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) की टीम अक्तूबर 2012 में पार्क का दौरा कर चुकी है। वर्ष 1984 में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क का दर्जा पाने वाला देश के अन्य नेशनल पार्कों की फेहरिस्त में यह सबसे नया है। पार्क के अरण्यपाल बीएस राणा ने इस बार पार्क को वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा मिलने की उम्मीद जताई है।
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ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में जीव-जंतुओं की लगभग 375 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें दुर्लभ बर्फानी तेंदुआ, भालू, कस्तूरी मृग, घोरल, मोनाल, जाजुराणा और प्रवासी पक्षिओं की कई प्रजातियां शामिल हैं। बान, बुरांस, देवदार, चीड़, खनोर, अखरोट, जड़ी-बूटियां और अन्य पेड़-पौधे भी यहां पाए जाते हैं।
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23 जून, 2013 को कंबोडिया में यूनेस्को की बैठक में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को विश्व धरोहर बनाने पर चर्चा हुई थी। 21 देशों के यूनाइटेड नेशंस एजूकेशनल साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) की बैठक में कुछ खामियां रहने से पार्क को वर्ल्ड हेरिटेज साइट दर्जा नहीं मिल पाया था।
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दर्जा पाने वाला देश का छठा पार्क होगा
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा पाने वाला देश का छठा पार्क होगा। अभी तक सुंदरवन, काजीरंगा, मानस, नंदादेवी तथा दक्षिण भारत के वेस्टन घाट पार्कों को यह दर्जा मिला है। सूबे के सबसे बड़े नेशनल पार्क की जैव विविधता को देखते हुए यूनाइटेड नेशंस एजूकेशनल साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) की उच्च स्तरीय टीम ने 3 से 15 अक्तूबर 2012 तक दौरा किया है।
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जीव-जंतुओं की रक्षा को अभ्यारण्य बना कुल्लू जिले का ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क अब सूबे का सबसे बड़ा पार्क बन गया है। प्रदेश सरकार ने इंटेंशन कर नोटिफिकेशन कर पार्क के दायरे को 906 वर्ग किलोमीटर कर दिया है। पूर्व में इसका क्षेत्रफल 754.4 वर्ग किलोमीटर था। अब पार्क प्रबंधन ने सैंज के 61 तथा तीर्थन सेंक्चुरी के 91 वर्ग किमी को इसमें शामिल किया है। 265 वर्ग किलोमीटर का इको जोन क्षेत्र भी इसमें शामिल है। इसे लोगों के हक-हकूकों के चलते अभी बाहर रखा है। पार्क की जैव विविधता को देखते हुए इसे वर्ल्ड हेरिटेज बनाने की सूची में शामिल किया है। यूनाइटेड नेशंस एजूकेशनल साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) की टीम अक्तूबर 2012 में पार्क का दौरा कर चुकी है। वर्ष 1984 में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क का दर्जा पाने वाला देश के अन्य नेशनल पार्कों की फेहरिस्त में यह सबसे नया है। पार्क के अरण्यपाल बीएस राणा ने इस बार पार्क को वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा मिलने की उम्मीद जताई है।
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ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में जीव-जंतुओं की लगभग 375 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें दुर्लभ बर्फानी तेंदुआ, भालू, कस्तूरी मृग, घोरल, मोनाल, जाजुराणा और प्रवासी पक्षिओं की कई प्रजातियां शामिल हैं। बान, बुरांस, देवदार, चीड़, खनोर, अखरोट, जड़ी-बूटियां और अन्य पेड़-पौधे भी यहां पाए जाते हैं।
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23 जून, 2013 को कंबोडिया में यूनेस्को की बैठक में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को विश्व धरोहर बनाने पर चर्चा हुई थी। 21 देशों के यूनाइटेड नेशंस एजूकेशनल साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) की बैठक में कुछ खामियां रहने से पार्क को वर्ल्ड हेरिटेज साइट दर्जा नहीं मिल पाया था।
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दर्जा पाने वाला देश का छठा पार्क होगा
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा पाने वाला देश का छठा पार्क होगा। अभी तक सुंदरवन, काजीरंगा, मानस, नंदादेवी तथा दक्षिण भारत के वेस्टन घाट पार्कों को यह दर्जा मिला है। सूबे के सबसे बड़े नेशनल पार्क की जैव विविधता को देखते हुए यूनाइटेड नेशंस एजूकेशनल साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) की उच्च स्तरीय टीम ने 3 से 15 अक्तूबर 2012 तक दौरा किया है।