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पंडित मोटे राम की डायरी ने गुदगुदाया
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन के वार्षिक नाट्योत्सव कुल्लू रंग मेला का लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र में मुंशी प्रेम चंद की ओर से लिखित कहानी पंडित मोटे राम की डायरी के सफल मंचन के साथ आगाज हुआ।
एसोसिएशन की ओर से संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार व भाषा एवं संस्कृति विभाग कुल्लू के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किए जा रहे इस नाट्योत्सव की पहली संध्या में सुमित ठाकुर ने इस कहानी को एकल अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत कर दर्शकों को गुदगुदाया। प्रेम चंद की ओर से लिखित यह एक व्यंग्य है, जिसमें काशी का एक पंडित मोटे राम अपनी डायरी लिखता है। उससे परत दर परत वह खुलासा करता है कि किस तरह समाज में पंडे आम जन को उनके अंधविश्वासों का फायदा उठा कर लूटते हैं। वह भी उन में से एक है। मोटे राम काशी से मुंबई एक यजमान के बुलावे पर अनुष्ठान करने जाता है। उन्हें प्रभावित करने के लिए कई तरह के ढोंग भी करता है। लेकिन अंत में ढोंग करते करते खुद ही फंस जाता है। ढोंग करते कुछ ज्यादा खा लेता है तो पेट दर्द की वजह से डॉक्टर के पास जाता है तो डॉ. उसे ही लूट लेते हैं। उसे टीबी है यह कहकर उसके तरह-तरह के टेस्ट लेते हैं और पैसे ऐंठते हैं। इस तरह मोटे राम उल्टे लुट जाता है। लेकिन फिर भी वह दूसरों को भ्रमित कर लूटने का धंधा चालू ही रखता है। नाटक में रोशनी व्यवस्था आरती ठाकुर की रही, जबकि नाटक का निर्देशन केहर सिंह ठाकुर ने किया।
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कुल्लू। एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन के वार्षिक नाट्योत्सव कुल्लू रंग मेला का लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र में मुंशी प्रेम चंद की ओर से लिखित कहानी पंडित मोटे राम की डायरी के सफल मंचन के साथ आगाज हुआ।
एसोसिएशन की ओर से संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार व भाषा एवं संस्कृति विभाग कुल्लू के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किए जा रहे इस नाट्योत्सव की पहली संध्या में सुमित ठाकुर ने इस कहानी को एकल अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत कर दर्शकों को गुदगुदाया। प्रेम चंद की ओर से लिखित यह एक व्यंग्य है, जिसमें काशी का एक पंडित मोटे राम अपनी डायरी लिखता है। उससे परत दर परत वह खुलासा करता है कि किस तरह समाज में पंडे आम जन को उनके अंधविश्वासों का फायदा उठा कर लूटते हैं। वह भी उन में से एक है। मोटे राम काशी से मुंबई एक यजमान के बुलावे पर अनुष्ठान करने जाता है। उन्हें प्रभावित करने के लिए कई तरह के ढोंग भी करता है। लेकिन अंत में ढोंग करते करते खुद ही फंस जाता है। ढोंग करते कुछ ज्यादा खा लेता है तो पेट दर्द की वजह से डॉक्टर के पास जाता है तो डॉ. उसे ही लूट लेते हैं। उसे टीबी है यह कहकर उसके तरह-तरह के टेस्ट लेते हैं और पैसे ऐंठते हैं। इस तरह मोटे राम उल्टे लुट जाता है। लेकिन फिर भी वह दूसरों को भ्रमित कर लूटने का धंधा चालू ही रखता है। नाटक में रोशनी व्यवस्था आरती ठाकुर की रही, जबकि नाटक का निर्देशन केहर सिंह ठाकुर ने किया।
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