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बारिश से कोसी नदी की बांध में बने गड्ढे
Updated Tue, 31 Jul 2018 12:37 AM IST
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स्वार (रामपुर)। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश व रामनगर बैराज से छोड़े गए 5169 क्यूसेक पानी से कोसी नदी का जल स्तर बढ़ गया। इस वजह से किसानों की पलेज में लगी सब्जी की फसल जलमग्न हो गईं। वहीं कई दिन से हो रही बारिश से कोसी नदी पर बने बांध में भी कई जगह गड्ढे बने गए हैं।
कई दिनों से पहाड़ी व मैदानी इलाकों में हो रही लगातार वर्षा एवं रविवार और सोमवार को रामनगर बैराज से 5160 क्यूसेक पानी छोड़ने से कोसी का जल स्तर बढ़ गया। जिससे खादर क्षेत्र में लगीं किसानों की फसलें जलमग्न हो गई। इस वजह से किसानों की पलेजों में लगी लौकी, टमाटर, तुरई, टिंडा की सब्जी पानी मे डूब गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है । वहीं कोसी नदी में जल स्तर बढ़ जाने से लोगों को कोसी नदी के दूसरे छोर पर स्थित खेतों से अपने जानवरों के लिए चारा लाने में भी काफी कठिनाई हो रही है। वह बामुश्किल अपने जानवरों के लिए नदी में तैर कर चारा लाने को मजबूर हैं। वहींकई गांव को बाढ़ से बचाने के लिए 14 करोड़ से बने बांध पर सिंचाई विभाग की अनदेखी के चलते बारिश से जगह जगह गड्ढे व दरारे पड़ गई। प्रशासन व सिंचाई विभाग ने नदी में क्षतिग्रस्त हुए लकड़ी व पत्थरों के स्पर की मरम्मत तक नहीं कराई है और न ही जगह जगह बांध को बचाने के लिए रेत से भरे बोरों को लगाया गया है। तहसीलदार कृष्ण गोपाल मिश्रा ने बताया कि बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए है और सिंचाई विभाग को बांध का निरीक्षण कर मरम्मत कराने को कहा गया है
कई दिनों से पहाड़ी व मैदानी इलाकों में हो रही लगातार वर्षा एवं रविवार और सोमवार को रामनगर बैराज से 5160 क्यूसेक पानी छोड़ने से कोसी का जल स्तर बढ़ गया। जिससे खादर क्षेत्र में लगीं किसानों की फसलें जलमग्न हो गई। इस वजह से किसानों की पलेजों में लगी लौकी, टमाटर, तुरई, टिंडा की सब्जी पानी मे डूब गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है । वहीं कोसी नदी में जल स्तर बढ़ जाने से लोगों को कोसी नदी के दूसरे छोर पर स्थित खेतों से अपने जानवरों के लिए चारा लाने में भी काफी कठिनाई हो रही है। वह बामुश्किल अपने जानवरों के लिए नदी में तैर कर चारा लाने को मजबूर हैं। वहींकई गांव को बाढ़ से बचाने के लिए 14 करोड़ से बने बांध पर सिंचाई विभाग की अनदेखी के चलते बारिश से जगह जगह गड्ढे व दरारे पड़ गई। प्रशासन व सिंचाई विभाग ने नदी में क्षतिग्रस्त हुए लकड़ी व पत्थरों के स्पर की मरम्मत तक नहीं कराई है और न ही जगह जगह बांध को बचाने के लिए रेत से भरे बोरों को लगाया गया है। तहसीलदार कृष्ण गोपाल मिश्रा ने बताया कि बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए है और सिंचाई विभाग को बांध का निरीक्षण कर मरम्मत कराने को कहा गया है
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