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स्क्रब टाइफस व जलजनित रोगों को लेकर अलर्ट जारी
Updated Tue, 11 Jul 2017 09:31 PM IST
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कुल्लू। स्क्रब टायफस और जलजनित रोगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जिला में अलर्ट जारी कर दिया है। उक्त बीमारियों की रोकथाम के लिए जिलाभर में जागरूकता गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं। बीमारी के लिए पीएचसी और सब सेंटर स्तर पर दवाइयां उपलब्ध करवा दी गई हैं। जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को आसपास स्वच्छता समेत बीमारी के लक्षण बताए जा रहे हैं।
स्क्रब टायफस एक जानलेवा बीमारी है। सही समय पर उपचार न होने पर रोगी की जान तक चली जाती है। हालांकि लक्षण दिखते ही उपचार करने पर बीमारी काबू पर आ जाती है। स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर स्क्रब टायफस से निपटने के लिए डॉक्सीस्लाइन दवा रहती है। जो कि रोगी को निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है। आम तौर पर बरसात के मौसम में तेज बुखार से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। यह बुखार स्क्रब टायफस भी हो सकता है। यह रोग एक जीवाणु विशेष (रिकेटशिया) से संक्रमित पिस्सु के काटने से फैलता है जो खेतों, झाड़ियों और घास में रहने वाले चूहों में पनपता है। यह जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और स्क्रब टायफस बुखार पैदा करता है। जुलाई से लेकर अक्तूबर तक इस बीमारी को फैलने की अधिक आशंका रहती है। इधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुशील चंद्र ने बताया कि स्क्रब टाइफस को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में स्क्रब टायफस के लिए दवा उपलब्ध है। जिला भर में जागरूकता गतिवधियां करवाई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि जलजनित रोगों से बचने के लिए बरसात के दौरान पानी उबाल कर ही पीएं या स्वच्छ पानी का इस्तेमाल करें। लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।
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बीमारी के लक्षण
-तेज बुखार आना जो 104 से 105 डिग्री तक हो सकता है।
-रोगी के जोड़ो में दर्द व कंपकनी के साथ बुखार आना।
-रोगी के शरीर में ऐंठन, अकडन या फिर रोगी का शरीर टूटने लगता है।
-अधिक संक्रमण में रोगी की गर्दन, बाजुओं के नीचे व कूल्हों के ऊपर गिल्टियां होना।
ऐसे करें बचाव
-शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखे।
-घर के चारों ओर अगी घास की समय-समय पर सफाई करें।
-खरपतवार को उगने न दें।
-आवास के अंदर और आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
-खेतों में काम करते समय टांग, पांव व बाजू ढककर रखे।
-लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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स्क्रब टायफस एक जानलेवा बीमारी है। सही समय पर उपचार न होने पर रोगी की जान तक चली जाती है। हालांकि लक्षण दिखते ही उपचार करने पर बीमारी काबू पर आ जाती है। स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर स्क्रब टायफस से निपटने के लिए डॉक्सीस्लाइन दवा रहती है। जो कि रोगी को निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है। आम तौर पर बरसात के मौसम में तेज बुखार से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। यह बुखार स्क्रब टायफस भी हो सकता है। यह रोग एक जीवाणु विशेष (रिकेटशिया) से संक्रमित पिस्सु के काटने से फैलता है जो खेतों, झाड़ियों और घास में रहने वाले चूहों में पनपता है। यह जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और स्क्रब टायफस बुखार पैदा करता है। जुलाई से लेकर अक्तूबर तक इस बीमारी को फैलने की अधिक आशंका रहती है। इधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुशील चंद्र ने बताया कि स्क्रब टाइफस को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में स्क्रब टायफस के लिए दवा उपलब्ध है। जिला भर में जागरूकता गतिवधियां करवाई जा रही हैं।
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उन्होंने बताया कि जलजनित रोगों से बचने के लिए बरसात के दौरान पानी उबाल कर ही पीएं या स्वच्छ पानी का इस्तेमाल करें। लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।
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बीमारी के लक्षण
-तेज बुखार आना जो 104 से 105 डिग्री तक हो सकता है।
-रोगी के जोड़ो में दर्द व कंपकनी के साथ बुखार आना।
-रोगी के शरीर में ऐंठन, अकडन या फिर रोगी का शरीर टूटने लगता है।
-अधिक संक्रमण में रोगी की गर्दन, बाजुओं के नीचे व कूल्हों के ऊपर गिल्टियां होना।
ऐसे करें बचाव
-शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखे।
-घर के चारों ओर अगी घास की समय-समय पर सफाई करें।
-खरपतवार को उगने न दें।
-आवास के अंदर और आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
-खेतों में काम करते समय टांग, पांव व बाजू ढककर रखे।
-लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।