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देवी-देवताओं, बुजुर्गों का जूब देकर लिया आशीर्वाद
Updated Mon, 17 Sep 2018 07:32 PM IST
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सायर पर्व
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिले में सोमवार को आश्विन संक्रांति के अवसर पर सायर पर्व धूमधाम से मनाया गया। सायर पर्व में घरों में जूब देकर बुजुर्गों और देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया। देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना भी की गई। अपने आराध्य देवता के दर्शनों के लिए देवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
सायर संक्रांति के साथ ही उझी घाटी हलाण, मणिकर्ण घाटी के पड़ेई, धारगण, व्यासर, तांदला, शांघड़ और बागन आदि स्थानों पर शौयरी मेलों का भी आगाज हो गया है। सायर पर्व को लेकर बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिला। शहरी क्षेत्रों में भी लोगों ने सायर पर्व की परंपरा का निर्वहन किया। घर आए मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन सिड्डू, भल्ले और देसी घी के पकवान परोसे गए। घाटीवासी लालचंद ठाकुर, सुतीश, कमल, चंदेराम, राजेश, मोहन, महेश, चुन्नी लाल, कैलाश, सुरेश, कोमल ने कहा कि सायर पर्व के अवसर उन्होंने घर-घर जाकर बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया। कहा कि युवाओं को अपनी संस्कृति को संजोए रखने के लिए इन परंपराओं को निभाना सायर पर्व प्रमुख त्यौहारों में से एक है। सात दिनों तक गांवों में जूब देने व मेलों का आयोजन चलता रहेगा। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष जयचंद ठाकुर ने कहा कि सायरी साजा पर्व को कुल्लू में धूमधाम से मनाया गया। पर्व के मौके पर देवी-देवताओं की विशेष पूजा अर्चना हुई। देवताओं को जूब देने के बाद घरों में जूब बांटी गई। देवी-देवताओं को विभिन्न प्रकार के भोग भी लगाए गए।
सैंज घाटी में सायर संक्रांति के उपलक्ष्य पर विभिन्न स्थानों पर देवी-देवताओं की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। सैंज के धाऊगी, कनौण, रैला, बनोगी, सुचैहण और शांघड़ में देवताओं के समक्ष सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शीश नवाया। देवता कमेटी के प्रमुख पालसरा टेक सिंह ने कहा कि सायर संक्रांति में हर वर्ष प्राचीन परंपरा के अनुसार विशेष पूजा की जाती है। पुजारी दविंद्र, जगदीश शर्मा ने कहा कि इस दौरान महिलाओं की ओर से विशेष देवगीत भी गाए गए।
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कुल्लू। जिले में सोमवार को आश्विन संक्रांति के अवसर पर सायर पर्व धूमधाम से मनाया गया। सायर पर्व में घरों में जूब देकर बुजुर्गों और देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया। देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना भी की गई। अपने आराध्य देवता के दर्शनों के लिए देवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
सायर संक्रांति के साथ ही उझी घाटी हलाण, मणिकर्ण घाटी के पड़ेई, धारगण, व्यासर, तांदला, शांघड़ और बागन आदि स्थानों पर शौयरी मेलों का भी आगाज हो गया है। सायर पर्व को लेकर बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिला। शहरी क्षेत्रों में भी लोगों ने सायर पर्व की परंपरा का निर्वहन किया। घर आए मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन सिड्डू, भल्ले और देसी घी के पकवान परोसे गए। घाटीवासी लालचंद ठाकुर, सुतीश, कमल, चंदेराम, राजेश, मोहन, महेश, चुन्नी लाल, कैलाश, सुरेश, कोमल ने कहा कि सायर पर्व के अवसर उन्होंने घर-घर जाकर बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया। कहा कि युवाओं को अपनी संस्कृति को संजोए रखने के लिए इन परंपराओं को निभाना सायर पर्व प्रमुख त्यौहारों में से एक है। सात दिनों तक गांवों में जूब देने व मेलों का आयोजन चलता रहेगा। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष जयचंद ठाकुर ने कहा कि सायरी साजा पर्व को कुल्लू में धूमधाम से मनाया गया। पर्व के मौके पर देवी-देवताओं की विशेष पूजा अर्चना हुई। देवताओं को जूब देने के बाद घरों में जूब बांटी गई। देवी-देवताओं को विभिन्न प्रकार के भोग भी लगाए गए।
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सैंज घाटी में सायर संक्रांति के उपलक्ष्य पर विभिन्न स्थानों पर देवी-देवताओं की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। सैंज के धाऊगी, कनौण, रैला, बनोगी, सुचैहण और शांघड़ में देवताओं के समक्ष सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शीश नवाया। देवता कमेटी के प्रमुख पालसरा टेक सिंह ने कहा कि सायर संक्रांति में हर वर्ष प्राचीन परंपरा के अनुसार विशेष पूजा की जाती है। पुजारी दविंद्र, जगदीश शर्मा ने कहा कि इस दौरान महिलाओं की ओर से विशेष देवगीत भी गाए गए।
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