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सेब बगीचों में अब वूली एफिड कीट का हमला
Updated Sun, 04 Feb 2018 09:49 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
खराहल (कुल्लू)। लंबे सूखे के कारण बगीचों में कई कीट पतंगों का हमला भी तेज होने लगा है। सामान्य से ज्यादा तापमान बढ़ने और बर्फबारी तथा बारिश न होने के कारण सेब के बगीचों में कीटों का कहर भी बढ़ने लगा है। अत्यधिक सूखे के कारण बगीचों में पहले कैंकर रोग और सूली कीट ने हमला किया और अब वूली एफिड कीड़ों ने बगीचों में हमला कर दिया है। कीट पौधों की जड़ों और टहनियों से रस चूस रहे हैं। ऐसे में पौधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। समय पर बर्फबारी और बारिश न होने से यह समस्या पेश आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कीड़े सफेद रूई की तरह तने और टहनियों में डेरा जमा कर पौधों का रस चूस लेते हैं। अमूमन यह कीट अप्रैल में ज्यादा सक्रिय रहते हैं, लेकिन सूखे के चलते इस बार फरवरी में ही कीट बगीचों में पनप रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कीटों के हमले से प्रभावित भागों पर छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं। ऐसे में सेब के पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और ग्रसित पौधों में फल लगने की क्षमता भी कम होती है। घाटी के बागवान अमित, रोशन लाल, जयचंद, कमल, चमन, रामचंद, ज्ञान ठाकुर, चंदे राम, अमन और रोबिन का कहना है कि वूली एफिड कीट इस बार सूखे के कारण ज्यादा अधिक सक्रिय हो गया है। इस का कहर फरवरी माह ही दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पौधों की जड़ों और चोट वाली जगह पर अधिक मात्रा में कीट पनप रहे हैं। इस संबंध में बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. आरके शर्मा कहते हैं कि यह सामान्य कीट है। इस का निदान दवा के उपचार से पूर्ण रूप से हो जाता है। उन्होंने कहा कि बागवान फोरेट दवा को तौलिए के साथ मिलाएं। गर्मी के दौरान पत्तों पर क्लोरोपारलीफॉस जैसे रसायनिक के छिड़काव से इन पर पूरी तरह काबू पाया जा सकता है।
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खराहल (कुल्लू)। लंबे सूखे के कारण बगीचों में कई कीट पतंगों का हमला भी तेज होने लगा है। सामान्य से ज्यादा तापमान बढ़ने और बर्फबारी तथा बारिश न होने के कारण सेब के बगीचों में कीटों का कहर भी बढ़ने लगा है। अत्यधिक सूखे के कारण बगीचों में पहले कैंकर रोग और सूली कीट ने हमला किया और अब वूली एफिड कीड़ों ने बगीचों में हमला कर दिया है। कीट पौधों की जड़ों और टहनियों से रस चूस रहे हैं। ऐसे में पौधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। समय पर बर्फबारी और बारिश न होने से यह समस्या पेश आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कीड़े सफेद रूई की तरह तने और टहनियों में डेरा जमा कर पौधों का रस चूस लेते हैं। अमूमन यह कीट अप्रैल में ज्यादा सक्रिय रहते हैं, लेकिन सूखे के चलते इस बार फरवरी में ही कीट बगीचों में पनप रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कीटों के हमले से प्रभावित भागों पर छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं। ऐसे में सेब के पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और ग्रसित पौधों में फल लगने की क्षमता भी कम होती है। घाटी के बागवान अमित, रोशन लाल, जयचंद, कमल, चमन, रामचंद, ज्ञान ठाकुर, चंदे राम, अमन और रोबिन का कहना है कि वूली एफिड कीट इस बार सूखे के कारण ज्यादा अधिक सक्रिय हो गया है। इस का कहर फरवरी माह ही दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पौधों की जड़ों और चोट वाली जगह पर अधिक मात्रा में कीट पनप रहे हैं। इस संबंध में बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. आरके शर्मा कहते हैं कि यह सामान्य कीट है। इस का निदान दवा के उपचार से पूर्ण रूप से हो जाता है। उन्होंने कहा कि बागवान फोरेट दवा को तौलिए के साथ मिलाएं। गर्मी के दौरान पत्तों पर क्लोरोपारलीफॉस जैसे रसायनिक के छिड़काव से इन पर पूरी तरह काबू पाया जा सकता है।