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वन अधिकार कानून के तहत जल्द मिले अधिकार:मंच
Updated Thu, 03 May 2018 10:16 PM IST
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वन अधिकार कानून के
तहत मिले अधिकार : मंच
शिमला में वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल स्पीति)। हिमाचल वन अधिकार मंच के सदस्यों ने शिमला में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मिल कर वन अधिकार कानून 2006 से जुड़े मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपा। वन अधिकार कानून को लागू हुए 10 साल हो गए हैं और हिमाचल में आज भी सरकारी अधिकारियों को इस कानून की पूरी जानकारी तक नहीं हैं। जिसकी वजह से यह कानून हिमाचल में ढंग से लागू नहीं हुआ है। हालांकि पिछले 3 सालों में राज्य में 17534 वन अधिकार समितियों का गठन भी हो चुका है।
इस संबंध में मंच के समन्वयक अक्षय जसरोटिया ने कहा कि इस कानून को तुरंत लागू करने के लिए कांगड़ा, किन्नौर, चंबा और लाहौल स्पीति से किए गए निजी और सामूहिक अधिकारों के दावों पर निर्णय लिया जाए। यदि वनों का संरक्षण होना है तो सरकार को वनों के साथ रहने वाले समुदायों को भी स्थायी अधिकार देने होंगे। मंच के सदस्य जिला स्तरीय प्रशिक्षण और लोक जागरूकता का अभियान भी चला रहे हैं। जिसके चलते कम से कम कुछ क्षेत्रों में दावे भरने का कार्य आगे बढ़ पाया है।
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तहत मिले अधिकार : मंच
शिमला में वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल स्पीति)। हिमाचल वन अधिकार मंच के सदस्यों ने शिमला में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मिल कर वन अधिकार कानून 2006 से जुड़े मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपा। वन अधिकार कानून को लागू हुए 10 साल हो गए हैं और हिमाचल में आज भी सरकारी अधिकारियों को इस कानून की पूरी जानकारी तक नहीं हैं। जिसकी वजह से यह कानून हिमाचल में ढंग से लागू नहीं हुआ है। हालांकि पिछले 3 सालों में राज्य में 17534 वन अधिकार समितियों का गठन भी हो चुका है।
इस संबंध में मंच के समन्वयक अक्षय जसरोटिया ने कहा कि इस कानून को तुरंत लागू करने के लिए कांगड़ा, किन्नौर, चंबा और लाहौल स्पीति से किए गए निजी और सामूहिक अधिकारों के दावों पर निर्णय लिया जाए। यदि वनों का संरक्षण होना है तो सरकार को वनों के साथ रहने वाले समुदायों को भी स्थायी अधिकार देने होंगे। मंच के सदस्य जिला स्तरीय प्रशिक्षण और लोक जागरूकता का अभियान भी चला रहे हैं। जिसके चलते कम से कम कुछ क्षेत्रों में दावे भरने का कार्य आगे बढ़ पाया है।
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