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कैकई ने दशरथ से मांगा राम को वनवास,भरत को राजगद्दी
Updated Fri, 12 Oct 2018 01:09 AM IST
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स्वार। बुधवार को श्री सनातन धर्म राम लीला कमेटी के तत्वाधान में साप्ताहिक बाजार स्थित राम लीला मंचन का शुभारंभ मंथरा कैकेयी संवाद के साथ शुरू हुआ।
बुधवार की रात्रि रामलीला के मंचन का शुभारंभ मंथरा कैकेयी संवाद के साथ शुरू हुआ। जिसमें मंथरा रानी कैकई को राम को बनवास और भरत को राजगद्दी के लिए कान भर रही है। मंथरा द्वारा रानी को बार- बार भरत को राज गद्दी के लिये तैयार करने के दृश्य को लोगों द्वारा खूब सराहा गया।
बाद में रानी कैकेयी कोप भवन में चली जाती है जहां राजा दशरथ रानी से नाराजगी की बाबत पूछते है। तब रानी राजा द्वारा दिये गए दो वचनों को याद दिलाती है। तब राजा दो वचन मांगने को कहते है तब रानी कैकेयी राम को बनवास और भरत को राज गद्दी मांगती है। जिस पर राजा दशरथ की हालत बिगड़ जाती है। बाद में राम सीता लक्ष्मण बनवास के लिए वन चले जाते हैं। वन जाने का दृश्य राम लीला मंचन देख रहे लोग कलाकारों का अभिनय देख कर मंत्र मुग्ध हो गए।
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बुधवार की रात्रि रामलीला के मंचन का शुभारंभ मंथरा कैकेयी संवाद के साथ शुरू हुआ। जिसमें मंथरा रानी कैकई को राम को बनवास और भरत को राजगद्दी के लिए कान भर रही है। मंथरा द्वारा रानी को बार- बार भरत को राज गद्दी के लिये तैयार करने के दृश्य को लोगों द्वारा खूब सराहा गया।
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बाद में रानी कैकेयी कोप भवन में चली जाती है जहां राजा दशरथ रानी से नाराजगी की बाबत पूछते है। तब रानी राजा द्वारा दिये गए दो वचनों को याद दिलाती है। तब राजा दो वचन मांगने को कहते है तब रानी कैकेयी राम को बनवास और भरत को राज गद्दी मांगती है। जिस पर राजा दशरथ की हालत बिगड़ जाती है। बाद में राम सीता लक्ष्मण बनवास के लिए वन चले जाते हैं। वन जाने का दृश्य राम लीला मंचन देख रहे लोग कलाकारों का अभिनय देख कर मंत्र मुग्ध हो गए।
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