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बावड़ी से पानी ढोकर प्यास बुझाने को मजबूर
Updated Sat, 23 Dec 2017 06:53 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
न्यूली (कुल्लू)। सैंज घाटी की दुर्गम ग्राम पंचायत गाड़ापारली के वड़ेहठा, फरला, खराहड़ा मदानी, भाजीमान सोइण में ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीण प्राकृतिक जल स्रोत बावड़ी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। जबकि, इन गांवों को सरकार और आईपीएच विभाग आज तक पेयजल योजना से नहीं जोड़ पाया है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में विभाग के प्रति भारी रोष है। गौरतलब है कि चार गांवों में कुल डेढ़ सौ परिवार रहते हैं लेकिन पेयजल योजना न होने से अक्सर यहां पर लोगों को पेयजल को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय निवासी खेबा राम, वेलू राम, मनी, हीरा, डाबे राम, सालगी और जीतू ने कहा कि गांवों में पेयजल की सुचारु आपूर्ति के लिए आईपीएच विभाग की कोई स्कीम नहीं है। बर्फबारी के दिनों में कई दिनों तक लोगों को बर्फ को पिघलाकर गुजारना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पानी की बावड़ी काफी दूर है। प्यास बुझाने के लिए पानी पीठ पर उठाकर पहुंचाना पड़ रहा है। समस्या को कई बार स्थानीय नेताओं और सरकार के ध्यान में लाया गया लेकिन आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। उन्होंने आईपीएच विभाग से मांग करते हुए कहा है कि उक्त गांवों को पेयजल योजना से जोड़ा जाए। इस संबंध में आईपीएच विभाग के एसडीओ राकेश अवस्थी ने कहा है कि इन गांवों को पेयजल योजना से जोड़ने को लेकर डिटेल और प्रस्ताव मांगा गया है। जल्द इसका एस्टीमेट बनाकर सरकार को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद उक्त गांवों को पेयजल योजना से जोड़ा जाएगा।
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न्यूली (कुल्लू)। सैंज घाटी की दुर्गम ग्राम पंचायत गाड़ापारली के वड़ेहठा, फरला, खराहड़ा मदानी, भाजीमान सोइण में ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीण प्राकृतिक जल स्रोत बावड़ी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। जबकि, इन गांवों को सरकार और आईपीएच विभाग आज तक पेयजल योजना से नहीं जोड़ पाया है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में विभाग के प्रति भारी रोष है। गौरतलब है कि चार गांवों में कुल डेढ़ सौ परिवार रहते हैं लेकिन पेयजल योजना न होने से अक्सर यहां पर लोगों को पेयजल को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय निवासी खेबा राम, वेलू राम, मनी, हीरा, डाबे राम, सालगी और जीतू ने कहा कि गांवों में पेयजल की सुचारु आपूर्ति के लिए आईपीएच विभाग की कोई स्कीम नहीं है। बर्फबारी के दिनों में कई दिनों तक लोगों को बर्फ को पिघलाकर गुजारना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पानी की बावड़ी काफी दूर है। प्यास बुझाने के लिए पानी पीठ पर उठाकर पहुंचाना पड़ रहा है। समस्या को कई बार स्थानीय नेताओं और सरकार के ध्यान में लाया गया लेकिन आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। उन्होंने आईपीएच विभाग से मांग करते हुए कहा है कि उक्त गांवों को पेयजल योजना से जोड़ा जाए। इस संबंध में आईपीएच विभाग के एसडीओ राकेश अवस्थी ने कहा है कि इन गांवों को पेयजल योजना से जोड़ने को लेकर डिटेल और प्रस्ताव मांगा गया है। जल्द इसका एस्टीमेट बनाकर सरकार को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद उक्त गांवों को पेयजल योजना से जोड़ा जाएगा।