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लाव लश्कर सहित मणिकर्ण पहुंचे बिजली महादेव व माहुंटी नाग 17-30-51
Updated Fri, 01 Dec 2017 07:08 PM IST
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kullu devta
- फोटो : amarujala
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कुल्लू। खराहल और कशावरी फाटी के आराध्य देवता बिजली महादेव व माहुंटी नाग वीरवार शाम को धार्मिक नगरी मणिकर्ण में लाव लश्कर के साथ पहुंचे। ढोल नगाड़े, करनाल और नरसिंगों की स्वरलहरियों से पूरा मणिकर्ण गूंज उठा। देवताओं के मणिकर्ण पहुंचने के बाद दर्शनों के लिए श्रद्घालुओं का तांता लग गया। दोनों देवताओं को मार्गशीर्ष पूर्णिमा रविवार के दिन देव परंपराओं के साथ पवित्र स्नान करवाया जाएगा।
इससे पहले जरी में वीरवार सुबह देवताओं की विशेष पूजा अर्चना हुई। दोपहर बाद देवता लाव लश्कर के साथ मणिकर्ण के लिए रवाना हुए। कसोल में भी देवताओं का ग्रामीणों ने फूलमालाओं से स्वागत किया। देवता बिजली महादेव के कारदार अमरनाथ नेगी ने कहा कि मणिकर्ण पहुंचने के बाद शनिवार को देवताओं का मिलन भगवान राम से होगा। जो इस यात्रा का आकर्षण रहता है। राम दुआला से निकलने में देवता को करीब दो से तीन घंटे लगते हैं। देवधुनों के सहारे ही बाहर निकलते हैं। देवता बिजली महादेव जब राम दुआला में जाते हैं तो महादेव भगवान राम के पास ही बैठ जाते हैं। जिन्हें निकालना चुनौती होती है। पूर्णिमा के दिन 3 दिसंबर को देवविधान के साथ देवता बिजली महादेव का शाही स्नान मणिकर्ण के पवित्र जल से किया जाएगा। महादेव के डेढ़ दर्जन से अधिक मंदिरों में जब भी किसी प्रकार का निर्माण या मरम्मत कार्य किया जाता है। तो इसके बाद देवता शाही स्नान को जाते हैं। वहीं देवताओं का नया रथ बनने के बाद भी देवता को शाही स्नान करवाने की परंपरा है। मान्यता के मुताबिक मणिकर्ण के पवित्र जल को महादेव ने निकाला था। इसलिए यह स्थान महादेव को अति प्रिय है। यहां पर साल भर किसी न किसी देवता का आगमन लगा रहता है।
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इससे पहले जरी में वीरवार सुबह देवताओं की विशेष पूजा अर्चना हुई। दोपहर बाद देवता लाव लश्कर के साथ मणिकर्ण के लिए रवाना हुए। कसोल में भी देवताओं का ग्रामीणों ने फूलमालाओं से स्वागत किया। देवता बिजली महादेव के कारदार अमरनाथ नेगी ने कहा कि मणिकर्ण पहुंचने के बाद शनिवार को देवताओं का मिलन भगवान राम से होगा। जो इस यात्रा का आकर्षण रहता है। राम दुआला से निकलने में देवता को करीब दो से तीन घंटे लगते हैं। देवधुनों के सहारे ही बाहर निकलते हैं। देवता बिजली महादेव जब राम दुआला में जाते हैं तो महादेव भगवान राम के पास ही बैठ जाते हैं। जिन्हें निकालना चुनौती होती है। पूर्णिमा के दिन 3 दिसंबर को देवविधान के साथ देवता बिजली महादेव का शाही स्नान मणिकर्ण के पवित्र जल से किया जाएगा। महादेव के डेढ़ दर्जन से अधिक मंदिरों में जब भी किसी प्रकार का निर्माण या मरम्मत कार्य किया जाता है। तो इसके बाद देवता शाही स्नान को जाते हैं। वहीं देवताओं का नया रथ बनने के बाद भी देवता को शाही स्नान करवाने की परंपरा है। मान्यता के मुताबिक मणिकर्ण के पवित्र जल को महादेव ने निकाला था। इसलिए यह स्थान महादेव को अति प्रिय है। यहां पर साल भर किसी न किसी देवता का आगमन लगा रहता है।
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