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तीन माह बाद स्वर्ग से लौटे देवता बड़ा छमांहू
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला कुल्लू की बंजार घाटी के देव बड़ा छमांहू तीन माह बाद स्वर्ग लोक से लौटे हैं। नव संवत के दिन देवता बड़ा छमांहू के तीन महीने बाद देवराज इंद्र की सभा से लौटने के साथ ही देवालय के कपाट खुल गए हैं। उनके स्वर्ग प्रवास से लौटने पर सैकड़ों लोगों ने स्वागत किया।
सोने-चांदी के मुख मोहरों से सजे देवता के देवरथ की कोटला गांव स्थित कोठी से यात्रा निकाली गई, जो माता के मंदिर तक निकली। उल्लेखनीय है कि देवता बड़ा छमांहू की 44 हजार रानियां (जोगणियां) हैं और स्वर्ग लोक से लौटते ही वह सबसे पहले जोगणियों से मिलने जाते हैं। शनिवार को इस अद्भुत धार्मिक दृश्य को देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचे थे। बड़ा छमांहू का अर्थ है छह देवताओं का एक देव। यानी एक रथ में छह देवी-देवता वास करते हैं। इनमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आदि, शक्ति व शेष नाग शामिल हैं। देवता के लौटते ही कोटला गांव में नव संवत मेला शुरू हुआ। देवता के कारदार मोहन सिंह ने कहा कि देवता बड़ा छमांहू तीन माह बाद स्वर्ग प्रवास से लौटे हैं। देवता के दर्शन के लिए सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
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कुल्लू। जिला कुल्लू की बंजार घाटी के देव बड़ा छमांहू तीन माह बाद स्वर्ग लोक से लौटे हैं। नव संवत के दिन देवता बड़ा छमांहू के तीन महीने बाद देवराज इंद्र की सभा से लौटने के साथ ही देवालय के कपाट खुल गए हैं। उनके स्वर्ग प्रवास से लौटने पर सैकड़ों लोगों ने स्वागत किया।
सोने-चांदी के मुख मोहरों से सजे देवता के देवरथ की कोटला गांव स्थित कोठी से यात्रा निकाली गई, जो माता के मंदिर तक निकली। उल्लेखनीय है कि देवता बड़ा छमांहू की 44 हजार रानियां (जोगणियां) हैं और स्वर्ग लोक से लौटते ही वह सबसे पहले जोगणियों से मिलने जाते हैं। शनिवार को इस अद्भुत धार्मिक दृश्य को देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचे थे। बड़ा छमांहू का अर्थ है छह देवताओं का एक देव। यानी एक रथ में छह देवी-देवता वास करते हैं। इनमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आदि, शक्ति व शेष नाग शामिल हैं। देवता के लौटते ही कोटला गांव में नव संवत मेला शुरू हुआ। देवता के कारदार मोहन सिंह ने कहा कि देवता बड़ा छमांहू तीन माह बाद स्वर्ग प्रवास से लौटे हैं। देवता के दर्शन के लिए सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
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