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शिरढ़ में मूच्र्छित होकर एक बार फिर सचेत हो उठेगा नड़
Updated Tue, 29 May 2018 09:44 PM IST
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मूर्छित होकर एक बार फिर सचेत हो उठेगा नड़
हर तीसरे वर्ष शिरढ़ काहिका में निभाई जाती है परंपरा
हजारों लोग दैवीय शक्ति के साक्षात्कार के बनेंगे गवाह
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। देवी-देवताओं की धरती कुल्लू में यहां की अनूठी देव परंपराओं का निर्वहन सदियों से किया जा रहा है। ऐसी ही एक परंपरा का निर्वहन 31 मई को ऊझी घाटी के शिरढ़ में किया जाएगा।
शिरढ़ में मूर्छित होने के बाद नड़ फिर सचेत हो उठेगा। दैवीय शक्तियों का साक्षात्कार सैकड़ों लोग देख सकेंगे। उत्सव की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मान्यता के अनुसार पुरातन समय में जब देवता कालिया नाग शिरढ़ गांव आए थे तो उनके साथ एक नड़ भी आया लेकिन यह नड़ शिरढ़ की नागणी सौह (नागों के स्थान) में मर गया। जब देवता यहां पहुंचे तो देवता ने उसे मृत पाया। देवता को पश्चाताप हुआ। देवता ने हरिपुर सोयल में इसी वर्ग के संबंधित लोगों को इसकी सूचना दी। तब इस वर्ग के लोगों ने कहा कि अब इसका पश्चाताप करना होगा। हर तीसरे साल काहिका करना होगा, जिसमें नड़ को जीवित किया जाएगा। इसके बाद हर तीसरे साल नड़ को मूर्छित कर सचेत करने की परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। देवता के पुजारी नरेंद्र शर्मा ने कहा कि परंपरा का निर्वहन सदियों से किया जा रहा है। 31 मई को नड़ को मूर्छित किया जाएगा। इसके बाद दैवीय शक्तियों से नड़ को सचेत किया जाएगा। देव उत्सव की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
कल से शुरू होगा मेला
30 मई से 6 जून तक चलने वाले शिरढ़ काहिका मेले का आगाज 30 मई को जागरा से होगा। बुधवार को देवता के हारियान और कारकून सहित इसमें श्रद्धालु भाग लेंगे। इसके बाद 31 मई को हुल्की के साथ नड़ बदाह की रस्म को पूरा किया जाएगा। देवता वीरनाथ बंदरोल, वीरनाथ रायसन डेहरासेरी, देवता थान शिम, देवता कराल गौहरी, शिल्ला से नारायण, देवता पाशाकोट शेलड़ी, देवता नाग धूमल हलाण, दुआड़ा के देवता विष्णु भी देव आदेश पर हारियानों के साथ शिरकत करते हैं।
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हर तीसरे वर्ष शिरढ़ काहिका में निभाई जाती है परंपरा
हजारों लोग दैवीय शक्ति के साक्षात्कार के बनेंगे गवाह
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। देवी-देवताओं की धरती कुल्लू में यहां की अनूठी देव परंपराओं का निर्वहन सदियों से किया जा रहा है। ऐसी ही एक परंपरा का निर्वहन 31 मई को ऊझी घाटी के शिरढ़ में किया जाएगा।
शिरढ़ में मूर्छित होने के बाद नड़ फिर सचेत हो उठेगा। दैवीय शक्तियों का साक्षात्कार सैकड़ों लोग देख सकेंगे। उत्सव की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मान्यता के अनुसार पुरातन समय में जब देवता कालिया नाग शिरढ़ गांव आए थे तो उनके साथ एक नड़ भी आया लेकिन यह नड़ शिरढ़ की नागणी सौह (नागों के स्थान) में मर गया। जब देवता यहां पहुंचे तो देवता ने उसे मृत पाया। देवता को पश्चाताप हुआ। देवता ने हरिपुर सोयल में इसी वर्ग के संबंधित लोगों को इसकी सूचना दी। तब इस वर्ग के लोगों ने कहा कि अब इसका पश्चाताप करना होगा। हर तीसरे साल काहिका करना होगा, जिसमें नड़ को जीवित किया जाएगा। इसके बाद हर तीसरे साल नड़ को मूर्छित कर सचेत करने की परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। देवता के पुजारी नरेंद्र शर्मा ने कहा कि परंपरा का निर्वहन सदियों से किया जा रहा है। 31 मई को नड़ को मूर्छित किया जाएगा। इसके बाद दैवीय शक्तियों से नड़ को सचेत किया जाएगा। देव उत्सव की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
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कल से शुरू होगा मेला
30 मई से 6 जून तक चलने वाले शिरढ़ काहिका मेले का आगाज 30 मई को जागरा से होगा। बुधवार को देवता के हारियान और कारकून सहित इसमें श्रद्धालु भाग लेंगे। इसके बाद 31 मई को हुल्की के साथ नड़ बदाह की रस्म को पूरा किया जाएगा। देवता वीरनाथ बंदरोल, वीरनाथ रायसन डेहरासेरी, देवता थान शिम, देवता कराल गौहरी, शिल्ला से नारायण, देवता पाशाकोट शेलड़ी, देवता नाग धूमल हलाण, दुआड़ा के देवता विष्णु भी देव आदेश पर हारियानों के साथ शिरकत करते हैं।
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