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स्पर वेरायटी सेब की मंडियों में दस्तक
Updated Sat, 29 Jul 2017 09:59 PM IST
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खराहल (कुल्लू)। विदेशी किस्म के सेब मंडियों में पहुंचना शुरू हो गया है। बंदरोल सब्जी मंडी में 78 से 85 रुपये प्रतिकिलो तक ए श्रेणी का सेब बिका है। दाम बेहतर मिलने से बागवान गदगद है। मंडियों में स्पर वैरायटी की किस्म में स्कारलेट-2, जैरामाइन, सुपर चीफ, विलोक्स आदि सेब को मंडियों में अच्छे दाम मिल रहे हैं। हालांकि इनकी तादाद अभी कम है।
जानकारी के अनुसार इन किस्मों में सामान्य रॉयल से दो सप्ताह पहले रंग आ जाता है। अभी चुनिंदा बागवान ही इन किस्मों को पैदा कर रहे हैं। बागवान मनोज ठाकुर, अमित, चमन, चुनी लाल और रोशन आदि ने कहा कि अर्ली वैरायटी के सेब में पूरी तरह से रंग आ चुका है। इनके रेट भी अच्छे बागवानों को मिल रहे हैं। इन वैरायटी के पौधों में तीन साल के बाद ही फल मिल जाते हैं, लेकिन इन के पौधे बौने ही होते हैं।
उद्यान विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर के अनुसार स्पर वैरायटी में सामान्य रॉयल से दो सप्ताह पहले रंग आ जाने से मार्केट में अच्छे दाम मिल रहे हैं। आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन मोहन लाल ठाकुर ने बताया कि अर्ली वैरायटी के सेब 78 से 85 रुपये तक बोली लगाई गई, लेकिन अभी सेब की कम ही क्रेट मंडी में पहुंच रही हैं। बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजकुमार शर्मा के अनुसार अर्ली वैरायटी के सेब में रंग की कोई समस्या नहीं होती है और साइज भी बेहतर बन जाता है। ऐसे में बागवानों को इन किस्मों की कीमत बेहतर मिल रही है।
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जानकारी के अनुसार इन किस्मों में सामान्य रॉयल से दो सप्ताह पहले रंग आ जाता है। अभी चुनिंदा बागवान ही इन किस्मों को पैदा कर रहे हैं। बागवान मनोज ठाकुर, अमित, चमन, चुनी लाल और रोशन आदि ने कहा कि अर्ली वैरायटी के सेब में पूरी तरह से रंग आ चुका है। इनके रेट भी अच्छे बागवानों को मिल रहे हैं। इन वैरायटी के पौधों में तीन साल के बाद ही फल मिल जाते हैं, लेकिन इन के पौधे बौने ही होते हैं।
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उद्यान विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर के अनुसार स्पर वैरायटी में सामान्य रॉयल से दो सप्ताह पहले रंग आ जाने से मार्केट में अच्छे दाम मिल रहे हैं। आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन मोहन लाल ठाकुर ने बताया कि अर्ली वैरायटी के सेब 78 से 85 रुपये तक बोली लगाई गई, लेकिन अभी सेब की कम ही क्रेट मंडी में पहुंच रही हैं। बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजकुमार शर्मा के अनुसार अर्ली वैरायटी के सेब में रंग की कोई समस्या नहीं होती है और साइज भी बेहतर बन जाता है। ऐसे में बागवानों को इन किस्मों की कीमत बेहतर मिल रही है।
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