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कूड़ा संयंत्र को लेकर फिर बढ़ेगी मुश्किल
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। पिरड़ी कूड़ा संयंत्र में दो जनवरी के बाद नगर परिषद कूड़ा कचरा नहीं फेंक सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने अब नगर परिषद को फिर समय देने से मना कर दिया है। इससे जिला प्रशासन के साथ नगर परिषद की समस्या बढ़ गई है। आठ हफ्ते का समय दो जनवरी को खत्म होने जा रहा है। हालांकि बीते तीन महीनों में नगर परिषद कुल्लू ने तीन से चार अलग-अगल जगहों पर नई साइटों को देखा। लेकिन स्थानीय पंचायत व जनता के विरोध के कारण एनओसी नहीं मिली है। अगर जल्द नई साइट का चयन नहीं किया गया तो शहर में फिर से कड़े कचरे के ढेर लग जाएंगे।
जिला मुख्यालय के साथ गांधीनगर नाले को भी साइट के लिए चिन्हित किया गया। नगर परिषद स्वयं ही इसकी अनुमति नहीं दे सका। वन अधिकार समिति ने पिरड़ी कूड़ा संयंत्र को लेकर पिछले वर्ष विरोध किया। यह प्रदर्शन दशहरा से ठीक पहले तक करीब 19 दिनों तक चला था। इस बीच नगर परिषद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और जिला प्रशासन व नगर परिषद कुल्लू को बड़ी राहत देते हुए चार हफ्ते का स्टे लगाया था। इसके बाद नगर परिषद फिर सुप्रीम कोर्ट गई और आठ हफ्ते का समय लिया। कोर्ट ने इसका विकल्प तलाशने के आदेश दिए थे। लेकिन तीसरी बार नगर परिषद करीब दो सप्ताह पहले फिर सुप्रीम कोर्ट गई और याचिका दायर की। लेकिन कोर्ट ने अब और समय देने से इनकार कर दिया। पिरड़ी मामले को लेकर मंगलवार को जिला प्रशासन की एक लंबी बैठक भी हुई। इसमें क्या निर्णय हुआ इसका खुलासा नहीं हो सका। लेकिन पिरड़ी मामला जिला प्रशासन और नगर परिषद के लिए गले की फांस बन गया है। नगर परिषद कुल्लू के कार्यकारी अधिकारी तेजा सिंह ठाकुर ने कहा कि उनके पास दो जनवरी तक का समय है। वैकल्पिक तौर पर कुछ जगहों को तलाशा जा रहा है। इसे जल्द फाइनल किया जाएगा।
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कुल्लू। पिरड़ी कूड़ा संयंत्र में दो जनवरी के बाद नगर परिषद कूड़ा कचरा नहीं फेंक सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने अब नगर परिषद को फिर समय देने से मना कर दिया है। इससे जिला प्रशासन के साथ नगर परिषद की समस्या बढ़ गई है। आठ हफ्ते का समय दो जनवरी को खत्म होने जा रहा है। हालांकि बीते तीन महीनों में नगर परिषद कुल्लू ने तीन से चार अलग-अगल जगहों पर नई साइटों को देखा। लेकिन स्थानीय पंचायत व जनता के विरोध के कारण एनओसी नहीं मिली है। अगर जल्द नई साइट का चयन नहीं किया गया तो शहर में फिर से कड़े कचरे के ढेर लग जाएंगे।
जिला मुख्यालय के साथ गांधीनगर नाले को भी साइट के लिए चिन्हित किया गया। नगर परिषद स्वयं ही इसकी अनुमति नहीं दे सका। वन अधिकार समिति ने पिरड़ी कूड़ा संयंत्र को लेकर पिछले वर्ष विरोध किया। यह प्रदर्शन दशहरा से ठीक पहले तक करीब 19 दिनों तक चला था। इस बीच नगर परिषद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और जिला प्रशासन व नगर परिषद कुल्लू को बड़ी राहत देते हुए चार हफ्ते का स्टे लगाया था। इसके बाद नगर परिषद फिर सुप्रीम कोर्ट गई और आठ हफ्ते का समय लिया। कोर्ट ने इसका विकल्प तलाशने के आदेश दिए थे। लेकिन तीसरी बार नगर परिषद करीब दो सप्ताह पहले फिर सुप्रीम कोर्ट गई और याचिका दायर की। लेकिन कोर्ट ने अब और समय देने से इनकार कर दिया। पिरड़ी मामले को लेकर मंगलवार को जिला प्रशासन की एक लंबी बैठक भी हुई। इसमें क्या निर्णय हुआ इसका खुलासा नहीं हो सका। लेकिन पिरड़ी मामला जिला प्रशासन और नगर परिषद के लिए गले की फांस बन गया है। नगर परिषद कुल्लू के कार्यकारी अधिकारी तेजा सिंह ठाकुर ने कहा कि उनके पास दो जनवरी तक का समय है। वैकल्पिक तौर पर कुछ जगहों को तलाशा जा रहा है। इसे जल्द फाइनल किया जाएगा।
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