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घर वापसी को सोलंगनाला में 250 लोगों ने डाला डेरा
Updated Mon, 19 Nov 2018 06:55 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
मनाली (कुल्लू)। कड़ाके की ठंड के बीच पिछले दो दिनों से लाहौल जाने के लिए रोहतांग टनल के बैरियर पर सोलंगनाला में 250 लाहौलवासियों ने डेरा डाला हुआ है। लेकिन आवाजाही की सुविधा न मिलने से शाम को निराश होकर वापस मनाली आने को मजबूर हैं। लाहौलवासी इसी आस में बैठे है कि कब बैरियर खुलेगा और उन्हें रोहतांग टनल से लाहौल अपने घर पहुंचने का मौका मिलेगा।
महिलाएं अपने बच्चों के साथ सुबह आठ बजे से भूखे प्यासे कड़ाके की ठंड में बैरियर के पास बैठ जाती हैं। लाहौल निवासी पदमा छेरिंग, आंग्मों, टशी, सोनम, अमर, अंगदुई, तारा चंद ने बताया कि सर्दियों के लिए आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं, खाद्य सामग्री व गर्म कपड़े लेने के लिए मनाली आए थे। इस बीच भारी बर्फबारी से रोहतांग बंद हो गया है और करीब 250 लोग फंस गए हैं। अब न तो रोहतांग दर्रा बहाल हो रहा है और न ही टनल से लाहौल जाने दिया जा रहा है। शासन व प्रशासन भी उनकी गुहार नहीं सुन रहा है। हेलीकॉप्टर उड़ान भी नहीं हो रही है। ऐसे में उन्हें जाने के लिए कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। दिनभर भूखे प्यासे इंतजार के बाद घर जाने की उम्मीद नहीं दिख रही है। बताया कि शासन व प्रशासन से बातचीत के बावजूद घर पहुंचने का कोई माध्यम नहीं दिख रहा है। रोजाना हो रहे खर्चे से उनके पास पैसा भी कम ही बचा है। उन्होंने शासन व प्रशासन से मांग की है कि लाहौल भेजने के लिए व्यवस्था की जाए।
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मनाली (कुल्लू)। कड़ाके की ठंड के बीच पिछले दो दिनों से लाहौल जाने के लिए रोहतांग टनल के बैरियर पर सोलंगनाला में 250 लाहौलवासियों ने डेरा डाला हुआ है। लेकिन आवाजाही की सुविधा न मिलने से शाम को निराश होकर वापस मनाली आने को मजबूर हैं। लाहौलवासी इसी आस में बैठे है कि कब बैरियर खुलेगा और उन्हें रोहतांग टनल से लाहौल अपने घर पहुंचने का मौका मिलेगा।
महिलाएं अपने बच्चों के साथ सुबह आठ बजे से भूखे प्यासे कड़ाके की ठंड में बैरियर के पास बैठ जाती हैं। लाहौल निवासी पदमा छेरिंग, आंग्मों, टशी, सोनम, अमर, अंगदुई, तारा चंद ने बताया कि सर्दियों के लिए आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं, खाद्य सामग्री व गर्म कपड़े लेने के लिए मनाली आए थे। इस बीच भारी बर्फबारी से रोहतांग बंद हो गया है और करीब 250 लोग फंस गए हैं। अब न तो रोहतांग दर्रा बहाल हो रहा है और न ही टनल से लाहौल जाने दिया जा रहा है। शासन व प्रशासन भी उनकी गुहार नहीं सुन रहा है। हेलीकॉप्टर उड़ान भी नहीं हो रही है। ऐसे में उन्हें जाने के लिए कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। दिनभर भूखे प्यासे इंतजार के बाद घर जाने की उम्मीद नहीं दिख रही है। बताया कि शासन व प्रशासन से बातचीत के बावजूद घर पहुंचने का कोई माध्यम नहीं दिख रहा है। रोजाना हो रहे खर्चे से उनके पास पैसा भी कम ही बचा है। उन्होंने शासन व प्रशासन से मांग की है कि लाहौल भेजने के लिए व्यवस्था की जाए।
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