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सूखे से 20 फीसदी पेयजल योजनाएं हांफी
Updated Sun, 26 Nov 2017 10:03 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू।
सूखे का असर घाटी की सैकड़ों पेयजल स्कीमों पर पड़ने लगा है। जिला कुल्लू में कुल 600 पेयजल योजनाओं में से 20 फीसदी यानी 100 से अधिक अधिक पेयजल स्कीमों ने अभी से ही जवाब देना शुरू कर दिया है। इसका असर जिला के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी पड़ रहा है।
पेयजल योजनाओं के मुख्य स्त्रोतों में पानी कम हो रहा है। इससे जिले की ऊझी घाटी के नग्गर, खराहल, बंजार, मणिकर्ण, तीर्थन, बाह्य सराज आनी-निरमंड के लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। करीब तीन माह से चल रहे सूखे से जिले के लोगों को दोहरी मार पड़ गई है।
एक ओर जहां खेत-खलिहानों और बाग-बगीचों में निराई, बिजाई तथा तौलिया बनाने का काम रुक सा गया है, तो वहीं गांव और शहरों में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। ग्रामीण इलाकों के लोग मीलों दूूर सेे नदी-नालों का पानी ढोकर गुजारा कर रहे हैं।
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ग्रामीण होशियार सिंह, बालक राम, बेली राम, केवल राम, संगीता, उमा, कांता देवी, गीता तथा रमा ने कहा कि खराहल घाटी में पेयजल की कमी महसूस होने लगी है। समय के अनुसार पानी नहीं मिल हो रहा है। उधर, बंजार इलाके की तीर्थन तथा तीन कोठी के लोगों में पेयजल के लिए त्राहिमाम है।
मुख्य स्रोतों में कम हुआ पानी : आजाद
आईपीएच कुल्लू के सहायक अभियंता एसआर आजाद ने कहा कि सूखे से ऊंचाई वाले इलाकों से जोड़ी गई पेयजल स्कीमों के मुख्य स्त्रोत में पानी सूखना शुरू हो गया है और इसका असर पेयजल की सप्लाई में पड़ा है। उन्होंने कहा कि बारिश या बर्फबारी होने से स्थिति सामान्य हो जाएगी।
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जिला कुल्लू में आईपीएच महकमे की करीब 600 पेयजल स्कीमें संचालित हैं। जिसमें 100 से अधिक स्कीमें भारी सूखे की चपेट में आ गई है। कुल्लू डिविजन में ही विभाग के 200 से अधिक योजनाएं है और इसमें तीन दर्जन के आसपास योजनाओं ने जवाब दे दिया है।
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कुल्लू।
सूखे का असर घाटी की सैकड़ों पेयजल स्कीमों पर पड़ने लगा है। जिला कुल्लू में कुल 600 पेयजल योजनाओं में से 20 फीसदी यानी 100 से अधिक अधिक पेयजल स्कीमों ने अभी से ही जवाब देना शुरू कर दिया है। इसका असर जिला के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी पड़ रहा है।
पेयजल योजनाओं के मुख्य स्त्रोतों में पानी कम हो रहा है। इससे जिले की ऊझी घाटी के नग्गर, खराहल, बंजार, मणिकर्ण, तीर्थन, बाह्य सराज आनी-निरमंड के लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। करीब तीन माह से चल रहे सूखे से जिले के लोगों को दोहरी मार पड़ गई है।
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एक ओर जहां खेत-खलिहानों और बाग-बगीचों में निराई, बिजाई तथा तौलिया बनाने का काम रुक सा गया है, तो वहीं गांव और शहरों में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। ग्रामीण इलाकों के लोग मीलों दूूर सेे नदी-नालों का पानी ढोकर गुजारा कर रहे हैं।
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ग्रामीण होशियार सिंह, बालक राम, बेली राम, केवल राम, संगीता, उमा, कांता देवी, गीता तथा रमा ने कहा कि खराहल घाटी में पेयजल की कमी महसूस होने लगी है। समय के अनुसार पानी नहीं मिल हो रहा है। उधर, बंजार इलाके की तीर्थन तथा तीन कोठी के लोगों में पेयजल के लिए त्राहिमाम है।
मुख्य स्रोतों में कम हुआ पानी : आजाद
आईपीएच कुल्लू के सहायक अभियंता एसआर आजाद ने कहा कि सूखे से ऊंचाई वाले इलाकों से जोड़ी गई पेयजल स्कीमों के मुख्य स्त्रोत में पानी सूखना शुरू हो गया है और इसका असर पेयजल की सप्लाई में पड़ा है। उन्होंने कहा कि बारिश या बर्फबारी होने से स्थिति सामान्य हो जाएगी।
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जिला कुल्लू में आईपीएच महकमे की करीब 600 पेयजल स्कीमें संचालित हैं। जिसमें 100 से अधिक स्कीमें भारी सूखे की चपेट में आ गई है। कुल्लू डिविजन में ही विभाग के 200 से अधिक योजनाएं है और इसमें तीन दर्जन के आसपास योजनाओं ने जवाब दे दिया है।
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