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जिला अस्पताल में चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं
Updated Sun, 04 Feb 2018 09:44 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। डॉक्टरों के अभाव में यहां पर उपचार करवाने आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सूबे के चार जिलों के लोग इस क्षेत्रीय अस्पताल में अपना उपचार करवाने पहुंचते हैं। लेकिन, पिछले सात माह से दो गायनी विशेषज्ञों की स्थायी तैनाती नहीं हो पाई है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने निजी क्षेत्र से डेपुटेशन पर गायनी विशेषज्ञ को तैनात किया है, लेकिन छह विधानसभा क्षेत्रों के लोग यहां पर उपचार करवाने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में एक अस्थायी तौर पर गायनी डॉक्टर को भी अधिक संख्या में पहुंचे मरीजों को देखना बहुत मुश्किल हो जाता है। जनसंख्या के लिहाज से अस्पताल में दो गायनी विशेषज्ञों की स्थायी नियुक्ति होना अति आवश्यक हैं। इतना ही नहीं, गंभीर मामलों में कुल्लू अस्पताल प्रशासन मरीजों को मंडी और शिमला रेफर करने को विवश है। आपातकालीन में लोगों को निजी अस्पताल में मंहगा उपचार करवाने को मजबूर होना पड़ता है। गौरतलब है कि अस्पताल में मुख्यमंत्री जयराम के इलाके सहित दो कैबिनेट मंत्री के लोग भी उपचार करने कुल्लू आते हैं। अब लोगों को आस है कि मुख्यमंत्री खाली पदों को जल्द भरेंगे। इसके अलावा द्रंग और पांगी समेत लाहौल-स्पीति के लोग भी क्षेत्रीय अस्पताल में उपचार करवाने के लिए पहुंचते हैं। कुल्लू निवासी अमित ठाकुर, अमन, चमन, बुद्धि प्रकाश, जयचंद, कमल महेश शर्मा, गीता ठाकुर तथा निर्मला ठाकुर आदि का कहना है कि अस्पताल में गायनी विशेषज्ञ न होने से गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। लोगों को निराश होकर निजी अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में गरीब लोगों को काफी परेशानी हो रही है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केएस मल्होत्रा ने कहा कि स्थिति को लेकर सरकार को अवगत करवाया गया है।
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कुल्लू/खराहल। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। डॉक्टरों के अभाव में यहां पर उपचार करवाने आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सूबे के चार जिलों के लोग इस क्षेत्रीय अस्पताल में अपना उपचार करवाने पहुंचते हैं। लेकिन, पिछले सात माह से दो गायनी विशेषज्ञों की स्थायी तैनाती नहीं हो पाई है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने निजी क्षेत्र से डेपुटेशन पर गायनी विशेषज्ञ को तैनात किया है, लेकिन छह विधानसभा क्षेत्रों के लोग यहां पर उपचार करवाने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में एक अस्थायी तौर पर गायनी डॉक्टर को भी अधिक संख्या में पहुंचे मरीजों को देखना बहुत मुश्किल हो जाता है। जनसंख्या के लिहाज से अस्पताल में दो गायनी विशेषज्ञों की स्थायी नियुक्ति होना अति आवश्यक हैं। इतना ही नहीं, गंभीर मामलों में कुल्लू अस्पताल प्रशासन मरीजों को मंडी और शिमला रेफर करने को विवश है। आपातकालीन में लोगों को निजी अस्पताल में मंहगा उपचार करवाने को मजबूर होना पड़ता है। गौरतलब है कि अस्पताल में मुख्यमंत्री जयराम के इलाके सहित दो कैबिनेट मंत्री के लोग भी उपचार करने कुल्लू आते हैं। अब लोगों को आस है कि मुख्यमंत्री खाली पदों को जल्द भरेंगे। इसके अलावा द्रंग और पांगी समेत लाहौल-स्पीति के लोग भी क्षेत्रीय अस्पताल में उपचार करवाने के लिए पहुंचते हैं। कुल्लू निवासी अमित ठाकुर, अमन, चमन, बुद्धि प्रकाश, जयचंद, कमल महेश शर्मा, गीता ठाकुर तथा निर्मला ठाकुर आदि का कहना है कि अस्पताल में गायनी विशेषज्ञ न होने से गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। लोगों को निराश होकर निजी अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में गरीब लोगों को काफी परेशानी हो रही है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केएस मल्होत्रा ने कहा कि स्थिति को लेकर सरकार को अवगत करवाया गया है।