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बर्फबारी पर रोहतांग दर्रा बहाल न करने का विरोध
Updated Wed, 15 Nov 2017 06:54 PM IST
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बीआरओ के ऐलान ने बढ़ाई लोगों की चिंता
बर्फबारी ने रोहतांग दर्रा बहाल नहीं करने का किया है एलान
बोले, घाटी में अभी सेब सीजन पीक पर
अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। 15 नवंबर के बाद बर्फबारी होने पर बीआरओ ने रोहतांग दर्रा बहाल नहीं करने का एलान किया है। बीआरओ के इस एक तरफा निर्णय का घाटी में जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है। लोगों के अनुसार क्या अपने ही लोगों की सुविधा के बीआरओ काम करती है।
इस संबंध में पूर्व जिप सदस्य प्रेम कटोच, रिगजिन हायरपा, पंचायत प्रधान संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कुमार ने कहा कि बीआरओ का इस तरह का बयान गैरजिम्मेदारना है। लाहौल घाटी में अभी सेब सीजन पीक पर है। अधिकतर लोगों ने अभी तक सर्दियों के लिए अनाज और अन्य जरूरी समानों का भंडारण तक नहीं किया है। बीआरओ के इस बयान से ऐसा महसूस होता है कि जनजातीय लोग देश का हिस्सा नहीं हैं।
सुरेश कुमार ने कहा कि इस हिस्से में भी देश के लोग बसते हैं, लेकिन कठिन भौगोलिक पृष्ठभूमि के कारण सर्दी के दिनों में यहां जीवन यापन करना देश के किसी दूसरे हिस्से के मुकाबले मुश्किल और चुनौतीपूर्ण है। लिहाजा बीआरओ के इस बयान से हजारों जनजातीय लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। हायरपा ने कहा कि अभी तक जीवनरक्षक दवाइयों के अलावा अन्य जरूरी सामानों का भंडारण नहीं किया गया है। ऐसे में फिलहाल सड़क को बहाल रखना जरूरी है। उधर, विधायक रवि ठाकुर ने कहा कि जनता की आवाज को वह बीआरओ के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।
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बर्फबारी ने रोहतांग दर्रा बहाल नहीं करने का किया है एलान
बोले, घाटी में अभी सेब सीजन पीक पर
अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। 15 नवंबर के बाद बर्फबारी होने पर बीआरओ ने रोहतांग दर्रा बहाल नहीं करने का एलान किया है। बीआरओ के इस एक तरफा निर्णय का घाटी में जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है। लोगों के अनुसार क्या अपने ही लोगों की सुविधा के बीआरओ काम करती है।
इस संबंध में पूर्व जिप सदस्य प्रेम कटोच, रिगजिन हायरपा, पंचायत प्रधान संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कुमार ने कहा कि बीआरओ का इस तरह का बयान गैरजिम्मेदारना है। लाहौल घाटी में अभी सेब सीजन पीक पर है। अधिकतर लोगों ने अभी तक सर्दियों के लिए अनाज और अन्य जरूरी समानों का भंडारण तक नहीं किया है। बीआरओ के इस बयान से ऐसा महसूस होता है कि जनजातीय लोग देश का हिस्सा नहीं हैं।
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सुरेश कुमार ने कहा कि इस हिस्से में भी देश के लोग बसते हैं, लेकिन कठिन भौगोलिक पृष्ठभूमि के कारण सर्दी के दिनों में यहां जीवन यापन करना देश के किसी दूसरे हिस्से के मुकाबले मुश्किल और चुनौतीपूर्ण है। लिहाजा बीआरओ के इस बयान से हजारों जनजातीय लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। हायरपा ने कहा कि अभी तक जीवनरक्षक दवाइयों के अलावा अन्य जरूरी सामानों का भंडारण नहीं किया गया है। ऐसे में फिलहाल सड़क को बहाल रखना जरूरी है। उधर, विधायक रवि ठाकुर ने कहा कि जनता की आवाज को वह बीआरओ के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।
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