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200 किमी का सफर कर दशहरा में पहुंचे 12 देवी देवता
Updated Sat, 20 Oct 2018 10:37 PM IST
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200 किमी का सफर कर दशहरा में पहुंचे 12 देवी देवता
निरमंड खंड से सात और आनी के पांच देवता हुए शरीक
350 साल से कुल्लू दशहरा में भाग ले रहे बाह्य सराज के देवता
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। 1650 से मनाए जा रहे देवी देवताओं के महाकुंभ कुल्लू दशहरा उत्सव में बाह्य सराज के देवी देवता भी अपनी अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। इस साल भी उत्सव में बाह्य सराज से 12 देवी देवता अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। इसमें जिला कुल्लू के सबसे अमीर देवी देवताओं में शुमार अधिष्ठाता खुडीजल भी शामिल हैं।
150 से 200 किलोमीटर की दूरी तय कर आए इन देवी देवताओं को कुल्लू पहुंचने में चार से पांच दिन का समय लगता है। जिला मुख्यालय कुल्लू में बाह्य सराज आनी और निरमंड से सैकड़ों लोग रहते हैं। इसमें सरकारी और गैर सरकारी नौकरी पेशा के अलावा कई युवा स्कूल कॉलेज में अध्ययनरत हैं, जो दशहरा की छुट्टी होने के बावजूद अपने आराध्य देवी देवताओं की चाकरी में लगे हैं। वहीं, अपने कृषि कार्य छोड़ कर किसान-बागवान देवताओं के साथ देव परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। दशहरा में आनी खंड से खुडीजल, ब्यास ऋषि टकरासी नाग, कोट पझारी और चोतरू नाग तथा निरमंड से देवता शरशाई नाग, देवता चंभु, उर्टू से चंभू, भुवनेश्वरी माता दुराह, देवता चंभु कशौली, सप्तऋषि और कुईकांडा नाग घाटू शामिल हैं। कारदार शेर सिंह, पुजारी शेर सिंह शर्मा, पूर्ण शर्मा और श्याम लाल ने कहा कि दशहरा में बाह्य सराज के देवी देवता 350 अधिक सालों से दशहरा में आ रहे हैं। दशहरा कमेटी के उपाध्यक्ष और डीसी यूनुस ने कहा कि कुल्लू दशहरा में दूरदराज क्षेत्रों से देवी-देवता पहुंचते हैं। यह दशहरा पर्व देवी-देवताओं से ही है। लोक और देव संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए आवश्यक पग उठाए जा रहे हैं।
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निरमंड खंड से सात और आनी के पांच देवता हुए शरीक
350 साल से कुल्लू दशहरा में भाग ले रहे बाह्य सराज के देवता
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। 1650 से मनाए जा रहे देवी देवताओं के महाकुंभ कुल्लू दशहरा उत्सव में बाह्य सराज के देवी देवता भी अपनी अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। इस साल भी उत्सव में बाह्य सराज से 12 देवी देवता अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। इसमें जिला कुल्लू के सबसे अमीर देवी देवताओं में शुमार अधिष्ठाता खुडीजल भी शामिल हैं।
150 से 200 किलोमीटर की दूरी तय कर आए इन देवी देवताओं को कुल्लू पहुंचने में चार से पांच दिन का समय लगता है। जिला मुख्यालय कुल्लू में बाह्य सराज आनी और निरमंड से सैकड़ों लोग रहते हैं। इसमें सरकारी और गैर सरकारी नौकरी पेशा के अलावा कई युवा स्कूल कॉलेज में अध्ययनरत हैं, जो दशहरा की छुट्टी होने के बावजूद अपने आराध्य देवी देवताओं की चाकरी में लगे हैं। वहीं, अपने कृषि कार्य छोड़ कर किसान-बागवान देवताओं के साथ देव परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। दशहरा में आनी खंड से खुडीजल, ब्यास ऋषि टकरासी नाग, कोट पझारी और चोतरू नाग तथा निरमंड से देवता शरशाई नाग, देवता चंभु, उर्टू से चंभू, भुवनेश्वरी माता दुराह, देवता चंभु कशौली, सप्तऋषि और कुईकांडा नाग घाटू शामिल हैं। कारदार शेर सिंह, पुजारी शेर सिंह शर्मा, पूर्ण शर्मा और श्याम लाल ने कहा कि दशहरा में बाह्य सराज के देवी देवता 350 अधिक सालों से दशहरा में आ रहे हैं। दशहरा कमेटी के उपाध्यक्ष और डीसी यूनुस ने कहा कि कुल्लू दशहरा में दूरदराज क्षेत्रों से देवी-देवता पहुंचते हैं। यह दशहरा पर्व देवी-देवताओं से ही है। लोक और देव संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए आवश्यक पग उठाए जा रहे हैं।
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