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सूखे से अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल में कटौती
Updated Mon, 04 Jun 2018 07:15 PM IST
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सूखे से अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल में कटौती
गांवों को रोटेशन पर की जा रही पेयजल आपूर्ति
दो दिन बाद मिल रहा पानी, लोगों की मुश्किलें बढ़ी
बलदेव राज
कुल्लू। जिला में सूखे के चलते शहरी क्षेत्रों के बाद अब ग्रामीण इलाकों में भी सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग ने पानी में कटौती कर दी है। ग्रामीण इलाकों में प्रतिदिन मिलने वाला पेयजल अब रोटेशन पर दूसरे या तीसरे दिन मिल रहा है। पेयजल योजनाओं के स्रोतों में आई कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में पेयजल किल्लत बढ़ गई है।
मौजूदा समय में खराहल घाटी में पेयजल की सबसे अधिक समस्या आ रही है। ऐेसे में विभाग अब रोटेशन पॉलिसी के तहत गांवों को बारी-बारी से पेयजल मुहैया करवा रहा है। लगभग हर गांव का तीसरे दिन नंबर आ रहा है। जिला में सूखे के चलते पांच दर्जन से अधिक पेयजल स्कीमें प्रभावित हुई हैं। पेयजल स्कीमों जल स्तर घटने से पेयजल आपूर्ति पर इसका असर हुआ है। वहीं, प्राकृतिक जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं। सैंज घाटी में कोटला क्षेत्र के शाहुंला गांव में स्थिति ऐसी है कि बावड़ी के पास पानी भरने के लिए लोगों घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। हैंडपंप भी खराब होने से लोगों का एकमात्र सहारा अब आईपीएच विभाग की पेयजल आपूर्ति पर है लेकिन पेयजल स्कीमों के स्रोतों में जलस्तर में कमी आने से विभाग को पेयजल आपूर्ति करना भी मुश्किल हो रहा है।
इधर, सूखे के मौसम में भी खेतों में पानी लगाने वाले कुछ लोग पेयजल की समस्या को और बढ़ा रहे हैं। ग्रामीण राजकुमार, दिलीप सिंह, टेढ़ी सिंह, सुनील राणा और मुकेश ने कहा कि सूखे से ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है। रोज मिलने वाला पानी अब रोटेशन पर मिल रहा है।
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वहीं इस संबंध में आईपीएच विभाग के सहायक अभियंता हरि प्रकाश भारद्वाज ने कहा कि खराहल और डुघीलग क्षेत्र में पानी की किल्लत के चलते रोटेशन पर पानी दिया जा रहा है। ग्रामग से डुघीलग के लिए 9 किलोमीटर पाइप लाइन को दुरुस्त किया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि पेयजल को व्यर्थ न गवाएं।
25 में से दो हैंडपंप लगाए
सूखे की स्थिति से निपटने के लिए जिला में 25 हैंडपंप लगाने का निर्णय लिया गया है। जिनमें से दो हैंडपंप लगा लिए गए हैं। तीसरे हैंडपंप पर काम चल रहा है। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है।
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गांवों को रोटेशन पर की जा रही पेयजल आपूर्ति
दो दिन बाद मिल रहा पानी, लोगों की मुश्किलें बढ़ी
बलदेव राज
कुल्लू। जिला में सूखे के चलते शहरी क्षेत्रों के बाद अब ग्रामीण इलाकों में भी सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग ने पानी में कटौती कर दी है। ग्रामीण इलाकों में प्रतिदिन मिलने वाला पेयजल अब रोटेशन पर दूसरे या तीसरे दिन मिल रहा है। पेयजल योजनाओं के स्रोतों में आई कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में पेयजल किल्लत बढ़ गई है।
मौजूदा समय में खराहल घाटी में पेयजल की सबसे अधिक समस्या आ रही है। ऐेसे में विभाग अब रोटेशन पॉलिसी के तहत गांवों को बारी-बारी से पेयजल मुहैया करवा रहा है। लगभग हर गांव का तीसरे दिन नंबर आ रहा है। जिला में सूखे के चलते पांच दर्जन से अधिक पेयजल स्कीमें प्रभावित हुई हैं। पेयजल स्कीमों जल स्तर घटने से पेयजल आपूर्ति पर इसका असर हुआ है। वहीं, प्राकृतिक जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं। सैंज घाटी में कोटला क्षेत्र के शाहुंला गांव में स्थिति ऐसी है कि बावड़ी के पास पानी भरने के लिए लोगों घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। हैंडपंप भी खराब होने से लोगों का एकमात्र सहारा अब आईपीएच विभाग की पेयजल आपूर्ति पर है लेकिन पेयजल स्कीमों के स्रोतों में जलस्तर में कमी आने से विभाग को पेयजल आपूर्ति करना भी मुश्किल हो रहा है।
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इधर, सूखे के मौसम में भी खेतों में पानी लगाने वाले कुछ लोग पेयजल की समस्या को और बढ़ा रहे हैं। ग्रामीण राजकुमार, दिलीप सिंह, टेढ़ी सिंह, सुनील राणा और मुकेश ने कहा कि सूखे से ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है। रोज मिलने वाला पानी अब रोटेशन पर मिल रहा है।
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वहीं इस संबंध में आईपीएच विभाग के सहायक अभियंता हरि प्रकाश भारद्वाज ने कहा कि खराहल और डुघीलग क्षेत्र में पानी की किल्लत के चलते रोटेशन पर पानी दिया जा रहा है। ग्रामग से डुघीलग के लिए 9 किलोमीटर पाइप लाइन को दुरुस्त किया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि पेयजल को व्यर्थ न गवाएं।
25 में से दो हैंडपंप लगाए
सूखे की स्थिति से निपटने के लिए जिला में 25 हैंडपंप लगाने का निर्णय लिया गया है। जिनमें से दो हैंडपंप लगा लिए गए हैं। तीसरे हैंडपंप पर काम चल रहा है। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है।