{"_id":"5a0b1ba84f1c1b60678bb2d1","slug":"151510677416-kullu-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभरा सरयोलसर झील","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभरा सरयोलसर झील
Updated Tue, 14 Nov 2017 10:22 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभरा सरयोलसर झील
सरयोलसर झील के किनारे स्थित है माता बूढ़ी नागिन का भव्य मंदिर
आस्थावान करते हैं प्रतिवर्ष झील व माता के दर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बंजार (कुल्लू)। सरयोलसर झील स्थित माता बूढ़ी नागिन के दर्शनों और झील को देखने के लिए इन दिनों रोजाना दर्जनों श्रद्घालु पहुंच रहे हैं। जिला कुल्लू और मंडी के स्कूली छात्र भी इन दिनों उक्त पावन स्थल की रमणीय वादियों को निहार पहुंचे रहे हैं। माता बूझूू नागिन मंदिर बंजार उपमंडल मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर घने जंगल के बीचोंबीच स्थित है। यह स्थल धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है, हालांकि यहां सुविधाएं नाममात्र भी नहीं हैं।
मुख्यालय की सबसे ऊंची चोटी 10280 फीट पर जलोड़ी दर्रे से 5 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पुरातन झील के किनारे मां बूढ़ी नागिन का भव्य मंदिर है। जलोड़ी पास तक बंजार से बस व छोटे वाहनों द्वारा जाया जा सकता है। यहां से पांच किलोमीटर तक इस पावन व पुरातन झील तक पैदल यात्रा करके दर्शन किए जा सकते हैं। जिला कुल्लू के खंड बंजार और आनी की सीमा से लगती आकर्षक झील यहां पर आने वाले पर्यटकों का मनमोह लेती है।
पुरातन व दंत कथा के अनुसार जिसकी मन्नत पूरी होती है वह दूसरे वर्ष खुशी के साथ यहां आरी देसी घी की सुराही या लौटा लेकर मंदिर से चल कर झील के चारों ओर घी की धार लगाकर परिक्रमा करता है। मान्यता के अनुसार झील में अगर कोई पत्ता गिर जाए तो चिड़िया उसे उठा कर ले जाती है और झील की सतह हमेशा साफ नजर आती है। झील की गहराई को कोई भी अभी तक माप नहीं पाया। सर्दियों के मौसम में अधिक बर्फबारी के कारण माता के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े राजीव कुमार, टेक चंद ठाकुर, मीना ठाकुर, संदीप कंवर, ललित और लीना आदि का कहना है कि अगर सरकार इन रमणीक स्थलों को पर्यटक की दृष्टि से संवारे तो यहां के बाशिंदों को रोजगार मिल सकता है। जलोड़ी जोत से माता बूढ़ी नागिन मंदिर व झील तक सभी पैदल यात्रा करते हैं अगर रास्ते में विभाग द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए पग उठाए जाएं तो पर्यटन स्थल विकसित हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरयोलसर झील के किनारे स्थित है माता बूढ़ी नागिन का भव्य मंदिर
आस्थावान करते हैं प्रतिवर्ष झील व माता के दर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बंजार (कुल्लू)। सरयोलसर झील स्थित माता बूढ़ी नागिन के दर्शनों और झील को देखने के लिए इन दिनों रोजाना दर्जनों श्रद्घालु पहुंच रहे हैं। जिला कुल्लू और मंडी के स्कूली छात्र भी इन दिनों उक्त पावन स्थल की रमणीय वादियों को निहार पहुंचे रहे हैं। माता बूझूू नागिन मंदिर बंजार उपमंडल मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर घने जंगल के बीचोंबीच स्थित है। यह स्थल धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है, हालांकि यहां सुविधाएं नाममात्र भी नहीं हैं।
मुख्यालय की सबसे ऊंची चोटी 10280 फीट पर जलोड़ी दर्रे से 5 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पुरातन झील के किनारे मां बूढ़ी नागिन का भव्य मंदिर है। जलोड़ी पास तक बंजार से बस व छोटे वाहनों द्वारा जाया जा सकता है। यहां से पांच किलोमीटर तक इस पावन व पुरातन झील तक पैदल यात्रा करके दर्शन किए जा सकते हैं। जिला कुल्लू के खंड बंजार और आनी की सीमा से लगती आकर्षक झील यहां पर आने वाले पर्यटकों का मनमोह लेती है।
विज्ञापन
पुरातन व दंत कथा के अनुसार जिसकी मन्नत पूरी होती है वह दूसरे वर्ष खुशी के साथ यहां आरी देसी घी की सुराही या लौटा लेकर मंदिर से चल कर झील के चारों ओर घी की धार लगाकर परिक्रमा करता है। मान्यता के अनुसार झील में अगर कोई पत्ता गिर जाए तो चिड़िया उसे उठा कर ले जाती है और झील की सतह हमेशा साफ नजर आती है। झील की गहराई को कोई भी अभी तक माप नहीं पाया। सर्दियों के मौसम में अधिक बर्फबारी के कारण माता के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े राजीव कुमार, टेक चंद ठाकुर, मीना ठाकुर, संदीप कंवर, ललित और लीना आदि का कहना है कि अगर सरकार इन रमणीक स्थलों को पर्यटक की दृष्टि से संवारे तो यहां के बाशिंदों को रोजगार मिल सकता है। जलोड़ी जोत से माता बूढ़ी नागिन मंदिर व झील तक सभी पैदल यात्रा करते हैं अगर रास्ते में विभाग द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए पग उठाए जाएं तो पर्यटन स्थल विकसित हो सकता है।
विज्ञापन