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माता बूढ़ी नागिन का कपाट हुआ बंद
Updated Sat, 18 Nov 2017 06:50 PM IST
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माता बूढ़ी नागिन का कपाट हुआ बंद
बर्फबारी के चलते बंद किया गया माता का मंदिर
अब बैसाख की संक्रांति को दर्शन देगी माता
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला कुल्लू के ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल सरयोलसर में वास करने वाली माता बूढ़ी नागिन का कपाट बंद हो गया है। शनिवार को ताजा बर्फबारी होने के बाद अब माता के दर्शन मध्य अप्रैल महीने में हो पाएंगे। समुद्रतल से करीब 10500 फुट ऊंचे सरयोलसर में सर्दियों के दिनों भारी बर्फबारी होने और शीतलहर चलने से यहां माता की पूजा पाठ करना संभव नहीं है। ऐसे में अब माता का कपाट बंद हो गया है।
अमूमन 15 नवंबर से इसे बंद कर दिया जाता है, लेकिन कई बार देरी से हिमपात होने पर इसे लेट बंद कर दिया जाता है। गत साल जनवरी माह में बर्फबारी होने से कपाट भी दिसंबर महीने में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद किया था, लेकिन इस साल मौसम ने नवंबर माह में करवट बदल ली है और शनिवार सुबह यहां पांच सेंटीमीटर ताजा बर्फ के फाहे गिरे हैं। जिससे यहां की पहाड़ियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली। पांच माह तक बंद रहने के बाद 15 अप्रैल को खुलने के बाद यहां माता के भक्तों का नवंबर माह तक आना जाना लगा रहा है। समर सीजन में यहां स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थी पिकनिक मनाने के आते हैं। वहीं, देशी-विदेशी पर्यटक भी यहां की वादियों को निहारने के साथ माता का आशीर्वाद लेते हैं। गौ माता की रक्षक और सुख शांति प्रदान करने के लिए विख्यात माता बूढ़ी नागिन को उनके भक्त मन्नत के रूप में घी का चढ़ावा चढ़ाते हैं। यहां सालाना करीब 50 हजार श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। माता बूढ़ी नागिन के कारदार भागे राम राणा ने कहा कि माता के कपाट को बैसाख महीने तक बंद कर दिया है। अब माता भक्त को 15 अप्रैल को दर्शन देगी।
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बर्फबारी के चलते बंद किया गया माता का मंदिर
अब बैसाख की संक्रांति को दर्शन देगी माता
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला कुल्लू के ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल सरयोलसर में वास करने वाली माता बूढ़ी नागिन का कपाट बंद हो गया है। शनिवार को ताजा बर्फबारी होने के बाद अब माता के दर्शन मध्य अप्रैल महीने में हो पाएंगे। समुद्रतल से करीब 10500 फुट ऊंचे सरयोलसर में सर्दियों के दिनों भारी बर्फबारी होने और शीतलहर चलने से यहां माता की पूजा पाठ करना संभव नहीं है। ऐसे में अब माता का कपाट बंद हो गया है।
अमूमन 15 नवंबर से इसे बंद कर दिया जाता है, लेकिन कई बार देरी से हिमपात होने पर इसे लेट बंद कर दिया जाता है। गत साल जनवरी माह में बर्फबारी होने से कपाट भी दिसंबर महीने में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद किया था, लेकिन इस साल मौसम ने नवंबर माह में करवट बदल ली है और शनिवार सुबह यहां पांच सेंटीमीटर ताजा बर्फ के फाहे गिरे हैं। जिससे यहां की पहाड़ियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली। पांच माह तक बंद रहने के बाद 15 अप्रैल को खुलने के बाद यहां माता के भक्तों का नवंबर माह तक आना जाना लगा रहा है। समर सीजन में यहां स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थी पिकनिक मनाने के आते हैं। वहीं, देशी-विदेशी पर्यटक भी यहां की वादियों को निहारने के साथ माता का आशीर्वाद लेते हैं। गौ माता की रक्षक और सुख शांति प्रदान करने के लिए विख्यात माता बूढ़ी नागिन को उनके भक्त मन्नत के रूप में घी का चढ़ावा चढ़ाते हैं। यहां सालाना करीब 50 हजार श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। माता बूढ़ी नागिन के कारदार भागे राम राणा ने कहा कि माता के कपाट को बैसाख महीने तक बंद कर दिया है। अब माता भक्त को 15 अप्रैल को दर्शन देगी।
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