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मरीजों को बिना सुन्न किए लगाए जा रहे टांके
Updated Sun, 13 Aug 2017 09:40 PM IST
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। केलांग स्थित जिला अस्पताल की हालत यह है कि यहां आने वाले मरीजों को बिना सुन्न किए ही टांके लगाए जा रहे हैं। अस्पताल में चीरा टांका लगाने से पहले लगाया जाने वाला इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं है। जबकि, किसी दुर्घटना के बाद इलाज के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों को टिटनेस का टीका भी उपलब्ध नहीं हो रहा है। भवनों और मशीनों पर सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च तो कर दिए, लेकिन टिटनेस और मरीज को सुन्न करने वाले इंजेक्शन उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं। गत बुधवार को एक हादसे में अपनी कटी उंगली कर टांका लगवाने अस्पताल पहुंचे गोशाल गांव के बुजुर्ग टशी राम ने बताया कि इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने से बिना सुन्न किए उन्हें पांच टांके लगाए गए। जबकि, अस्पताल में टिटनेस का इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं है। सुमनम गांव के रमेश ने बताया कि उनके बेटे के दांत भी बिना सुन्न किए ही उखाड़ा गया। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन रोगी कल्याण समिति के बजट से जरूरी दवाइयों की खरीद करने में सक्षम है। लेकिन, अस्पताल में मूलभूत दवाइयों का टोटा होना कहीं न कहीं अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही दिखती है। अस्पताल में अल्ट्रा साउंड मशीन तो है लेकिन इसे चलाने वाला रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। लिहाजा, छोटी सी बीमारी से पीड़ित मरीजों को कुल्लू और शिमला रेफर करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। वहीं, राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन इन दावों की यहां हवा निकलती नजर आ रही है। जिप सदस्य तंजिन करपा, प्रधान संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कुमार, पूर्व जिप सदस्य रिगजिन ने कहा कि अस्पताल की इतनी बदतर हालात पहले कभी नहीं रही। टिटनेस और सुन्न करने वाले इंजेक्शन का उपलब्ध नहीं होना दर्शाता है कि अस्पताल प्रशासन जनजातीय मरीजों की सेहत को लेकर कितना संजीदा है। सीएमओ केलांग डीडी शर्मा ने बताया कि जिन दवाइयों का स्टॉक खत्म है, उनकी सप्लाई का ऑर्डर दे दिया गया है।
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