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लाहौल-स्पीति के 75 फीसदी मतदान केंद्र की सड़कें बंद
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अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। लोकसभा चुनाव को लेकर देश में राजनीतिक दलों का प्रचार अभियान भी शुरू हो गया है। लेकिन देश का एक ऐसा हिस्सा ऐसा भी है, जहां पर चुनाव आयोग की टीमों को अभी पोलिंग बूथ तक पहुंचना संभव नहीं है। चुनाव आयोग ने विधानसभा क्षेत्र लाहौल-स्पीति में दुनिया का सबसे ऊंचा मतदान केंद्र बनाया है। यहां के 92 पोलिंग बूथों में से 75 फीसदी मतदान केंद्र अभी तक सड़क से जुड़ नहीं पाए हैं।
लाहौल घाटी के 95 फीसदी मतदान केंद्रों को जाने वाली संपर्क सड़कें बर्फ के कारण बंद हैं। देश के अन्य हिस्सों में चुनाव आयोग की टीमें हर पोलिंग बूथ का जायजा लेकर मतदाताओं को वोटिंग को लेकर प्रशिक्षण दे रही है। लाहौल-स्पीति में चुनाव के लिए गठित टीमें जिला मुख्यालय से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। अभी टीमों को पोलिंग बूथ पहुंच कर छूटे मतदाताओं के नाम का पंजीकरण करवाना है। पोलिंग बूथों में पहुंच कर बिजली और पानी की व्यवस्था का निरीक्षण करना है। लेकिन घाटी के भीतर सड़कें पूरी तरह अवरुद्ध होने से चुनाव की तैयारियों को लेकर आयोग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला प्रशासन अभी तक एक भी पोलिंग बूथ का जायजा नहीं ले सका है। हालांकि संपर्क मार्गों को बहाल करने का जिम्मा लोनिवि के पास है। लेकिन जब तक घाटी के भीतर केलांग-दारचा, केलांग-तिंदी और केलांग-कोकसर सड़कें बहाल नहीं हो जाती है, तब तक लोनिवि के लिए संपर्क मार्गों को खोलना संभव नहीं है। घाटी के भीतर मुख्य मार्गों का जिम्मा बीआरओ के पास है। घाटी के कुछ पोलिंग बूथ ऐसे भी हैं, जहां पर अभी भी छह से आठ फीट तक बर्फ की मोटी परत जमी हुई है। हालांकि स्पीति घाटी में हालात लाहौल से बेहतर हैं। यहां बीआरओ ने 90 फीसदी हिस्से को सड़क से जोड़ दिया है। कुछ दिन बाद देश के सबसे ऊंचे मतदान केंद्र टशीगंग को जाने वाली संपर्क सड़क खुलने वाली है। हालांकि चुनाव को अभी करीब दो माह का समय है। इसके बावजूद बीआरओ की सुस्ती से इस बार रोहतांग दर्रा देर से खुलने की आशंका जाहिर की जा रही है। चुनावी साल में बर्फ हटाने को लेकर बीआरओ की तरफ से हो रही देरी पर हर कोई हैरान है। 38 टीआरएफ के कमांडर कर्नल उमाकांत का कहना है कि स्नो क्लीयरेंस के लिए उन्हें सीमित बजट उपलब्ध होता है। ऐसे में मौसम के रुख को भांप कर ही बर्फ हटाने का काम किया जा रहा है। उधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता बीएस नेगी ने बताया कि जब तक बीआरओ मुख्य सड़क से बर्फ नहीं हटा लेता है तब तक संपर्क मार्गों को खोलना संभव नहीं है। हालांकि विभाग मंगलवार से गौशाल संपर्क मार्ग को बहाल करने जा रहा है।
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। लोकसभा चुनाव को लेकर देश में राजनीतिक दलों का प्रचार अभियान भी शुरू हो गया है। लेकिन देश का एक ऐसा हिस्सा ऐसा भी है, जहां पर चुनाव आयोग की टीमों को अभी पोलिंग बूथ तक पहुंचना संभव नहीं है। चुनाव आयोग ने विधानसभा क्षेत्र लाहौल-स्पीति में दुनिया का सबसे ऊंचा मतदान केंद्र बनाया है। यहां के 92 पोलिंग बूथों में से 75 फीसदी मतदान केंद्र अभी तक सड़क से जुड़ नहीं पाए हैं।
लाहौल घाटी के 95 फीसदी मतदान केंद्रों को जाने वाली संपर्क सड़कें बर्फ के कारण बंद हैं। देश के अन्य हिस्सों में चुनाव आयोग की टीमें हर पोलिंग बूथ का जायजा लेकर मतदाताओं को वोटिंग को लेकर प्रशिक्षण दे रही है। लाहौल-स्पीति में चुनाव के लिए गठित टीमें जिला मुख्यालय से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। अभी टीमों को पोलिंग बूथ पहुंच कर छूटे मतदाताओं के नाम का पंजीकरण करवाना है। पोलिंग बूथों में पहुंच कर बिजली और पानी की व्यवस्था का निरीक्षण करना है। लेकिन घाटी के भीतर सड़कें पूरी तरह अवरुद्ध होने से चुनाव की तैयारियों को लेकर आयोग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला प्रशासन अभी तक एक भी पोलिंग बूथ का जायजा नहीं ले सका है। हालांकि संपर्क मार्गों को बहाल करने का जिम्मा लोनिवि के पास है। लेकिन जब तक घाटी के भीतर केलांग-दारचा, केलांग-तिंदी और केलांग-कोकसर सड़कें बहाल नहीं हो जाती है, तब तक लोनिवि के लिए संपर्क मार्गों को खोलना संभव नहीं है। घाटी के भीतर मुख्य मार्गों का जिम्मा बीआरओ के पास है। घाटी के कुछ पोलिंग बूथ ऐसे भी हैं, जहां पर अभी भी छह से आठ फीट तक बर्फ की मोटी परत जमी हुई है। हालांकि स्पीति घाटी में हालात लाहौल से बेहतर हैं। यहां बीआरओ ने 90 फीसदी हिस्से को सड़क से जोड़ दिया है। कुछ दिन बाद देश के सबसे ऊंचे मतदान केंद्र टशीगंग को जाने वाली संपर्क सड़क खुलने वाली है। हालांकि चुनाव को अभी करीब दो माह का समय है। इसके बावजूद बीआरओ की सुस्ती से इस बार रोहतांग दर्रा देर से खुलने की आशंका जाहिर की जा रही है। चुनावी साल में बर्फ हटाने को लेकर बीआरओ की तरफ से हो रही देरी पर हर कोई हैरान है। 38 टीआरएफ के कमांडर कर्नल उमाकांत का कहना है कि स्नो क्लीयरेंस के लिए उन्हें सीमित बजट उपलब्ध होता है। ऐसे में मौसम के रुख को भांप कर ही बर्फ हटाने का काम किया जा रहा है। उधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता बीएस नेगी ने बताया कि जब तक बीआरओ मुख्य सड़क से बर्फ नहीं हटा लेता है तब तक संपर्क मार्गों को खोलना संभव नहीं है। हालांकि विभाग मंगलवार से गौशाल संपर्क मार्ग को बहाल करने जा रहा है।
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