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कुल्लू में सेब उत्पादन 50 फीसदी कम होने का अनुमान
Updated Fri, 11 May 2018 06:44 PM IST
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घाटी में सेब उत्पादन 50 फीसदी कम
खराब मौसम से सेब की सेटिंग प्रक्रिया हुई प्रभावित
सर्दियों में चिलिंग आवर्स पूरा नहीं होने का भी पड़ा असर
घाटी में लगातार दूसरी साल गिरा सेब का उत्पादन
बलदेव राज
कुल्लू। लाल रसीले सेब के लिए देश विदेश में विख्यात कुल्लू घाटी में इस बार सेब की करीब 50 फीसदी पैदावार कम होने का अनुमान है। खराब मौसम, ओलावृष्टि और आंधी तूफान से सेब की फसल को काफी झटका लगा है। कुल्लू घाटी में लगातार दूसरी साल उत्पादन गिरा है। इसकी मुख्य वजह विशेषज्ञ मौसम में आ रहे बदलाव को मान रहे हैं।
सेब की फ्लावरिंग के समय सेब पौधों में बंपर फूल नजर आ रहे थे लेकिन सेब की सेटिंग के दौरान घाटी में मौसम खराब रहा। जिससे सेब सेटिंग के दौरान तापमान कम होने से सेटिंग प्रभावित हुई। इसके अलावा सेब का उत्पादन कम होने की दूसरी मुख्य वजह चिलिंग आवर्स पूरा न होने को माना जा रहा है। सर्दियों के दौरान बर्फबारी बेहद कम हुई। जो बर्फबारी हुई वह सेब बेल्ट को छू तक नहीं पाई। ऐसे में सेब पौधों के आवश्यक चिलिंग आवर्स पूरे नहीं हो सके। जिसके चलते फ्लावरिंग भी ऊंचाई वाले इलाकों में पहले और निचले इलाकों में हुई।
बागवान महेंद्र सिंह, दीवान सिंह, अशोक कुमार, पूर्ण चंद, संतोष शर्मा ने कहा कि लगातार दूसरी साल उत्पादन गिरने से बागवानों को निराशा का सामना करना पड़ा है। इस बार नाशपाती की फसल कम है। ऐेसे में सेब पर बागवानों की उम्मीदें टिकी थीं लेकिन अब अधिकतर सेब बगीचे खाली ही नजर आ रहे हैं। गौर रहे कि कुल्लू से करोड़ों का सेब देश की विभिन्न मंडियों में पहुंचता है।
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इधर, बागवानी विभाग के उप निदेशक डॉ राजकुमार शर्मा के अनुसार खराब मौसम के कारण अभी तक 35 फीसदी फसल कम उत्पादन का आंकलन किया गया है लेकिन यह आंकड़ा अभी 50 प्रतिशत तक जा सकता है। सेब की सेटिंग के दौरान मौसम खराब रहने से फसल प्रभावित हुई है।
कुल्लू सदर फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन के महासचिव सुनील राणा ने कहा कि सेब की कम फसल को देखते हुए बागवानों को सेब के बेहतर दाम मिले, इसके लिए प्रयास किए जाएंगे। जिन बागवानों को ओलों के कारण नुकसान झेलना पड़ा है। सरकार ऐसे बागवानों को मुआवजा मुहैया करवाए।
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खराब मौसम से सेब की सेटिंग प्रक्रिया हुई प्रभावित
सर्दियों में चिलिंग आवर्स पूरा नहीं होने का भी पड़ा असर
घाटी में लगातार दूसरी साल गिरा सेब का उत्पादन
बलदेव राज
कुल्लू। लाल रसीले सेब के लिए देश विदेश में विख्यात कुल्लू घाटी में इस बार सेब की करीब 50 फीसदी पैदावार कम होने का अनुमान है। खराब मौसम, ओलावृष्टि और आंधी तूफान से सेब की फसल को काफी झटका लगा है। कुल्लू घाटी में लगातार दूसरी साल उत्पादन गिरा है। इसकी मुख्य वजह विशेषज्ञ मौसम में आ रहे बदलाव को मान रहे हैं।
सेब की फ्लावरिंग के समय सेब पौधों में बंपर फूल नजर आ रहे थे लेकिन सेब की सेटिंग के दौरान घाटी में मौसम खराब रहा। जिससे सेब सेटिंग के दौरान तापमान कम होने से सेटिंग प्रभावित हुई। इसके अलावा सेब का उत्पादन कम होने की दूसरी मुख्य वजह चिलिंग आवर्स पूरा न होने को माना जा रहा है। सर्दियों के दौरान बर्फबारी बेहद कम हुई। जो बर्फबारी हुई वह सेब बेल्ट को छू तक नहीं पाई। ऐसे में सेब पौधों के आवश्यक चिलिंग आवर्स पूरे नहीं हो सके। जिसके चलते फ्लावरिंग भी ऊंचाई वाले इलाकों में पहले और निचले इलाकों में हुई।
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बागवान महेंद्र सिंह, दीवान सिंह, अशोक कुमार, पूर्ण चंद, संतोष शर्मा ने कहा कि लगातार दूसरी साल उत्पादन गिरने से बागवानों को निराशा का सामना करना पड़ा है। इस बार नाशपाती की फसल कम है। ऐेसे में सेब पर बागवानों की उम्मीदें टिकी थीं लेकिन अब अधिकतर सेब बगीचे खाली ही नजर आ रहे हैं। गौर रहे कि कुल्लू से करोड़ों का सेब देश की विभिन्न मंडियों में पहुंचता है।
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इधर, बागवानी विभाग के उप निदेशक डॉ राजकुमार शर्मा के अनुसार खराब मौसम के कारण अभी तक 35 फीसदी फसल कम उत्पादन का आंकलन किया गया है लेकिन यह आंकड़ा अभी 50 प्रतिशत तक जा सकता है। सेब की सेटिंग के दौरान मौसम खराब रहने से फसल प्रभावित हुई है।
कुल्लू सदर फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन के महासचिव सुनील राणा ने कहा कि सेब की कम फसल को देखते हुए बागवानों को सेब के बेहतर दाम मिले, इसके लिए प्रयास किए जाएंगे। जिन बागवानों को ओलों के कारण नुकसान झेलना पड़ा है। सरकार ऐसे बागवानों को मुआवजा मुहैया करवाए।