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कुल्लू में चालीस दिन पहले हुआ होली का आगाज

Mon, 22 Jan 2018 10:13 PM IST
Updated Mon, 22 Jan 2018 10:13 PM IST
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कुल्लू में चालीस दिन पहले हुआ होली का आगाज
कुल्लू में बंसत पंचमी के मौके पर निकली भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा में भाग लेते श्रद्वालु। - फोटो : amarujala
कुल्लू। जिला के अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ के सोमवार को बसंत पंचमी के अवसर पर कुल्लू के ढालपुर मैदान पहुंचते ही यहां होली का आगाज हो गया है। देशभर में अयोध्या, मथुरा के अलावा कुल्लू जिला में चालीस दिन होली आगाज हुआ। अगले चालीस दिनों तक कुल्लू में वैरागी समुदाय के लोगों के द्वारा टोलियों में होली का गायन किया जाएगा। वहीं इस अवसर पर भगवान रघुनाथ को भी गुलाल चढ़ाया जाएगा।
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अयोध्या की तर्ज पर कुल्लू जिला में आज भी परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। 1651 को भगवान रघुनाथ को अयोध्या से कुल्लू लाया गया था। तब से लेकर आज तक यह परंपरा निभाई जा रही है। 40 दिनों तक गुलाल लगाया जाता है। सोमवार को आराध्य भगवान रघुनाथ लाव-लश्कर के साथ ढालपुर पहुंचे। अस्थायी के शिविर पहुंचने के बाद गुलाल उड़ा। इसके साथ ही कुल्लू में होली उत्सव का आगाज हो गया।
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वैरागी समुदाय के विनोद महंत, संजय महंत, महावीर महंत, दीपक महंत, सतीश और गोपाल कृष्ण महंत ने कहा कि वसंत पंचमी के मौके पर रघुनाथ के ढालपुर स्थित अस्थायी शिविर में पहुंचने के साथ ही होली का आगाज हो गया है। वैरागी समुदाय के लोगों के द्वारा अपने समुदाय में घर-घर जाकर होली के गीत गाएंगे। इस दौरान अपने से बड़ों का आशीर्वाद लेने के उनके चरणों पर गुलाल डाला जाएगा। जबकि छोटों को आशीर्वाद देने के लिए उनके सिर पर गुलाल डाला जाएगा। बराबर उम्र के लोग ही एक दूसरे के गाल पर गुलाल लगाएंगे।
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उन्होंने कहा कि वैरागी समुदाय के लोगों के द्वारा गाए गाने वाले गीत के ब्रज में ही गाए गाते हैं। इसमें फिल्मी गीत नहीं गाए जाते हैं। होली तक यह सिलसिला चला रहेगा। इधर, भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि बसंत उत्सव के साथ अयोध्या की तर्ज पर कुल्लू घाटी में भी होली का आगाज हो गया है। यह दौर 40 दिनों तक चलेगा। सदियों से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।


ऐसे गीत गाते हैं वैरागी समुदाय के लोग
...हरो रे भोले नाथ दिंगबर, अब तो कष्ट हरो, ...मैं न लड़ी थी शाम निकल गया, ... मैं कैसे होरी से खेलूं सावरिया जी के संग, रंग में, ...शिवों के संग भोले नाथों के संग होरी खेलन में जाऊं आदि ब्रज भाषा में कई गीत वैरागी समुदाय के लोगों के द्वारा गाए जाते हैं।
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