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सुरंग का काम पूरा होने की कगार पर, अब बना रहे कॉलोनी
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अमर उजाला ब्यूरो
केलांग/कोकसर। निर्माण के अंतिम चरण में पहुंची रोहतांग सुरंग परियोजना अवैध खनन के कथित आरोपों से विवादों में घिर गई है। आरोप है कि बीआरओ और निर्माण कंपनी देशहित के नाम पर जनजातीय इलाके में नियमों को ताक पर रखकर कथित तौर पर अवैध खनन कर रहे हैं।
बीआरओ के सुपुर्द की गई 108 बीघा वन भूमि पर एमओयू के मुताबिक कामगारों और स्टाफ के लिए कॉलोनी का निर्माण किया जाना था। लेकिन अभी तक बीआरओ ने इस भूमि का इस्तेमाल नहीं किया। अब जब रोहतांग टनल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में तो बीआरओ यहां पर कॉलोनी बनाने का दावा कर रही है, जो तर्क संगत नहीं है। बीआरओ गुफा होटल के पास अपना कॉलोनी बना चुकी है। चंद्रावैली से पूर्व जिप सदस्य प्रेम कटोच के अलावा स्थानीय महिला मंडल ने इस मामले को लेकर उपायुक्त लाहौल-स्पीति के साथ ही स्टेट जियोलॉजिस्ट को इस मामले की लिखित शिकायत की है। आरोप है कि रोहतांग टनल के नॉर्थ पोर्टल के पास सिस्सू पंचायत ने अस्थायी कॉलोनी बसाने के लिए साल 2007 में जिस 108 बीघा वन भूमि को बीरआरओ को स्थानांतरण करने के लिए एनओसी जारी की थी, वहां पर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है। मामले को लेकर स्थानीय महिला मंडल ने उपायुक्त को लिखित में शिकायत पत्र भी सौंपा है। प्रेम कटोच का कहना है कि लाहौल-स्पीति का इलाका संविधान के शेड्यूल-5 के तहत आता है। इलाके में किसी भी तरह के खनन और परियोजनाओं के निर्माण से पूर्व संबंधित पंचायत की एनओसी लेनी जरूरी है। ग्राम सभा ने इस भूमि को दोबारा वन विभाग के सुपुर्द करने का प्रस्ताव पारित किया है। आरोप लगाया कि प्रशासन और वन विभाग ने एफआरए और पेसा एक्ट की अवहेलना कर बिना ग्राम सभा की अनुमति के बीआरओ और कंपनी को खनन की इजाजत दे दी। खनन से चंद्रा नदी का रुख कभी भी गांव की तरफ हो सकता है। इससे सिस्सू हेलीपेड को भी खतरा पैदा हो गया है।
संयुक्त कमेटी की रिपोर्ट पर कॉलोनी के निर्माण के दौरान निकलने वाले पत्थर के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। रोहतांग टनल निर्माण के बाद स्थल पर कॉलोनी का निर्माण नहीं होता है तो बीआरओ के खिलाफ अवैध खनन के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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पुनित गुलेरिया, स्टेट जियोलॉजिस्ट
अन्य परियोजना के लिए कॉलोनी का निर्माण
रोहतांग टनल के मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर एनएम चंद्रराणा का कहना है कि रोहतांग टनल के बाद किसी अन्य परियोजना के लिए बीरआरओ वहां पर कॉलोनी का निर्माण करने जा रही है।
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केलांग/कोकसर। निर्माण के अंतिम चरण में पहुंची रोहतांग सुरंग परियोजना अवैध खनन के कथित आरोपों से विवादों में घिर गई है। आरोप है कि बीआरओ और निर्माण कंपनी देशहित के नाम पर जनजातीय इलाके में नियमों को ताक पर रखकर कथित तौर पर अवैध खनन कर रहे हैं।
बीआरओ के सुपुर्द की गई 108 बीघा वन भूमि पर एमओयू के मुताबिक कामगारों और स्टाफ के लिए कॉलोनी का निर्माण किया जाना था। लेकिन अभी तक बीआरओ ने इस भूमि का इस्तेमाल नहीं किया। अब जब रोहतांग टनल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में तो बीआरओ यहां पर कॉलोनी बनाने का दावा कर रही है, जो तर्क संगत नहीं है। बीआरओ गुफा होटल के पास अपना कॉलोनी बना चुकी है। चंद्रावैली से पूर्व जिप सदस्य प्रेम कटोच के अलावा स्थानीय महिला मंडल ने इस मामले को लेकर उपायुक्त लाहौल-स्पीति के साथ ही स्टेट जियोलॉजिस्ट को इस मामले की लिखित शिकायत की है। आरोप है कि रोहतांग टनल के नॉर्थ पोर्टल के पास सिस्सू पंचायत ने अस्थायी कॉलोनी बसाने के लिए साल 2007 में जिस 108 बीघा वन भूमि को बीरआरओ को स्थानांतरण करने के लिए एनओसी जारी की थी, वहां पर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है। मामले को लेकर स्थानीय महिला मंडल ने उपायुक्त को लिखित में शिकायत पत्र भी सौंपा है। प्रेम कटोच का कहना है कि लाहौल-स्पीति का इलाका संविधान के शेड्यूल-5 के तहत आता है। इलाके में किसी भी तरह के खनन और परियोजनाओं के निर्माण से पूर्व संबंधित पंचायत की एनओसी लेनी जरूरी है। ग्राम सभा ने इस भूमि को दोबारा वन विभाग के सुपुर्द करने का प्रस्ताव पारित किया है। आरोप लगाया कि प्रशासन और वन विभाग ने एफआरए और पेसा एक्ट की अवहेलना कर बिना ग्राम सभा की अनुमति के बीआरओ और कंपनी को खनन की इजाजत दे दी। खनन से चंद्रा नदी का रुख कभी भी गांव की तरफ हो सकता है। इससे सिस्सू हेलीपेड को भी खतरा पैदा हो गया है।
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संयुक्त कमेटी की रिपोर्ट पर कॉलोनी के निर्माण के दौरान निकलने वाले पत्थर के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। रोहतांग टनल निर्माण के बाद स्थल पर कॉलोनी का निर्माण नहीं होता है तो बीआरओ के खिलाफ अवैध खनन के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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पुनित गुलेरिया, स्टेट जियोलॉजिस्ट
अन्य परियोजना के लिए कॉलोनी का निर्माण
रोहतांग टनल के मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर एनएम चंद्रराणा का कहना है कि रोहतांग टनल के बाद किसी अन्य परियोजना के लिए बीरआरओ वहां पर कॉलोनी का निर्माण करने जा रही है।