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पौधों के तने पर चूने का घोल लगाने से रोगों का निजात
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बगीचों में पौधों के तने पर चूने का घोल लगाएं
विशेषज्ञों ने पौधों को बीमारी के बचाने के लिए बागवानों को दी सलाह
अमर उजाला ब्यूूरो
कुल्लू/खराहल। सर्दियों में शीतोष्ण फलों के पौधे तीन-चार महीनों तक भले ही सुप्त अवस्था में रहते हैं, लेकिन बगीचों में जरूरी एवं महत्वपूर्ण कार्य इस दौरान सबसे अधिक बागवान करते हैं। इस दौरान पौधों को जड़ों के जरिये संतुलित खाद देने और कांट-छांट कर बेहतर फसल के लिए तैयार किया जाता है।
बागवानी विशेषज्ञों ने पतझड़ के बाद बागवानों को पौधों के तने पर चूने के घोल को लगाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि चूने का लेप लगाने से पौधे पर कीट पतंगों और कई बीमारियों के पनपने की संभावना कम होती है। लिहाजा बागवानों को समय रहते इस कार्य को पूरा करना चाहिए। इससे पौधों को सूरज की तेज किरणों से भी सुरक्षा मिलती है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि चूने का लेप पौधों के तने पर लगाने से धूप की नीली किरणों के प्रभाव को तने पर पड़ने से रोक देता है। बागवानी विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर कहते हैं कि चूने के प्रयोग के कारण वूली एफिड और तना छेदक कीड़े भी अंडे नहीं दे पाते हैं और तनों की रक्षा होती है। उन्होंने कहा कि अगर बागवान अक्तूबर महीने में तने में चूना लगाने से चूक गए हैं तो पौधों के तनों पर चूना लगाने का कार्य मार्च महीने में कर सकते हैं। घाटी के बागवान अमन, रमेश, चमन, महेंद्र, लाल चंद, कैलाश, चुनी लाल तथा जय चंद आदि का कहना है कि पौधों के तने पर चूना लगाने से कीटों और कई रोगों से निजात मिल जाती है। बागवानी विभाग के उप निदेशक डॉ. आरके शर्मा बताते है कि 10 लीटर चूने का पेंट बनाने के लिए एक किलो नीला थोथा, तीन किलो चूना, एक लीटर अलसी तेल को नौ लीटर पानी में मिलाकर तैयार करें और फिर पौधे के तनों पर लगाएं।
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विशेषज्ञों ने पौधों को बीमारी के बचाने के लिए बागवानों को दी सलाह
अमर उजाला ब्यूूरो
कुल्लू/खराहल। सर्दियों में शीतोष्ण फलों के पौधे तीन-चार महीनों तक भले ही सुप्त अवस्था में रहते हैं, लेकिन बगीचों में जरूरी एवं महत्वपूर्ण कार्य इस दौरान सबसे अधिक बागवान करते हैं। इस दौरान पौधों को जड़ों के जरिये संतुलित खाद देने और कांट-छांट कर बेहतर फसल के लिए तैयार किया जाता है।
बागवानी विशेषज्ञों ने पतझड़ के बाद बागवानों को पौधों के तने पर चूने के घोल को लगाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि चूने का लेप लगाने से पौधे पर कीट पतंगों और कई बीमारियों के पनपने की संभावना कम होती है। लिहाजा बागवानों को समय रहते इस कार्य को पूरा करना चाहिए। इससे पौधों को सूरज की तेज किरणों से भी सुरक्षा मिलती है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि चूने का लेप पौधों के तने पर लगाने से धूप की नीली किरणों के प्रभाव को तने पर पड़ने से रोक देता है। बागवानी विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर कहते हैं कि चूने के प्रयोग के कारण वूली एफिड और तना छेदक कीड़े भी अंडे नहीं दे पाते हैं और तनों की रक्षा होती है। उन्होंने कहा कि अगर बागवान अक्तूबर महीने में तने में चूना लगाने से चूक गए हैं तो पौधों के तनों पर चूना लगाने का कार्य मार्च महीने में कर सकते हैं। घाटी के बागवान अमन, रमेश, चमन, महेंद्र, लाल चंद, कैलाश, चुनी लाल तथा जय चंद आदि का कहना है कि पौधों के तने पर चूना लगाने से कीटों और कई रोगों से निजात मिल जाती है। बागवानी विभाग के उप निदेशक डॉ. आरके शर्मा बताते है कि 10 लीटर चूने का पेंट बनाने के लिए एक किलो नीला थोथा, तीन किलो चूना, एक लीटर अलसी तेल को नौ लीटर पानी में मिलाकर तैयार करें और फिर पौधे के तनों पर लगाएं।
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