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जुआणी महादेव, वीर नाथ करेंगे शाही स्नान
Updated Sun, 09 Dec 2018 07:11 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। घाटी के आराध्य देवता जुआणी महोदव 19 दिसंबर को अपने देवालय स्थित न्योली से सैकड़ों हारियान और श्रद्धालुओं के साथ शाही स्नान करने मणिकर्ण जाएंगे। इसके लिए देवता के कारकूनों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
जुआणी महादेव के साथ बारी के देवता वीर नाथ भी मणिकर्ण रवाना होंगे। दोनों देवता की शोभा यात्रा न्योली मंदिर से आरंभ होगी। पहले दिन देवताओं का ठहराव शरशाड़ी गांव में होगा। यहां पर एक भक्त की ओर से देवताओं को रात्रि भोज आयोजन किया जाएगा। सुबह पूजा-अर्चना के बाद देवताओं की शोभा यात्रा दोबारा शुरू होगी और मणिकर्ण में रात्रि का ठहराव होगा। 21 दिसंबर को देवता ढोल की थाप पर राम मंदिर में पहुंच कर मुख्य द्वार की पूजा करेंगे। इसके बाद भगवान राम के मंदिर में विराजमान होगे। 22 दिसंबर को पूर्णिमा के दिन दोनों देवता देव विधि के अनुसार पवित्र जल से शाही स्नान करेंगे। देवताओं का स्नान वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ देवता के पुरोहित विशेष धोती पहनकर करेंगे। शाही स्नान के बाद देवताओं की शोभा यात्रा वापस देवालय के लिए शुरू होगी और रात्रि का ठहराव जरी में होगा, जहां पर देवता के एक भक्त की ओर से देवताओं के सम्मान में धाम का आयोजन किया जाएगा। देवता के कारदार ओम प्रकाश मंहत ने बताया कि जुआणी महादेव 11 वर्ष के बाद मणिकर्ण के लिए शाही स्नान करने जा रहे है। देवता वीर नाथ 14 साल बाद मणिकर्ण में डुबकी लगाएंगे। उन्होंने कहा कि देवता के मंदिर में 25 दिसंबर को देवभोज में न्योली, थरमाण, बराधा, जगोट, जुआणी, प्रेमगढ़, शांगरीबाग, त्राबंली, किंजा, माहिली, महाराजा, बारी ओडीधार, घराकड़ के हारियान और भक्त के अलावा कुल्लू के दूरदराज के श्रद्धालु भाग लेंगे।
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कुल्लू/खराहल। घाटी के आराध्य देवता जुआणी महोदव 19 दिसंबर को अपने देवालय स्थित न्योली से सैकड़ों हारियान और श्रद्धालुओं के साथ शाही स्नान करने मणिकर्ण जाएंगे। इसके लिए देवता के कारकूनों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
जुआणी महादेव के साथ बारी के देवता वीर नाथ भी मणिकर्ण रवाना होंगे। दोनों देवता की शोभा यात्रा न्योली मंदिर से आरंभ होगी। पहले दिन देवताओं का ठहराव शरशाड़ी गांव में होगा। यहां पर एक भक्त की ओर से देवताओं को रात्रि भोज आयोजन किया जाएगा। सुबह पूजा-अर्चना के बाद देवताओं की शोभा यात्रा दोबारा शुरू होगी और मणिकर्ण में रात्रि का ठहराव होगा। 21 दिसंबर को देवता ढोल की थाप पर राम मंदिर में पहुंच कर मुख्य द्वार की पूजा करेंगे। इसके बाद भगवान राम के मंदिर में विराजमान होगे। 22 दिसंबर को पूर्णिमा के दिन दोनों देवता देव विधि के अनुसार पवित्र जल से शाही स्नान करेंगे। देवताओं का स्नान वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ देवता के पुरोहित विशेष धोती पहनकर करेंगे। शाही स्नान के बाद देवताओं की शोभा यात्रा वापस देवालय के लिए शुरू होगी और रात्रि का ठहराव जरी में होगा, जहां पर देवता के एक भक्त की ओर से देवताओं के सम्मान में धाम का आयोजन किया जाएगा। देवता के कारदार ओम प्रकाश मंहत ने बताया कि जुआणी महादेव 11 वर्ष के बाद मणिकर्ण के लिए शाही स्नान करने जा रहे है। देवता वीर नाथ 14 साल बाद मणिकर्ण में डुबकी लगाएंगे। उन्होंने कहा कि देवता के मंदिर में 25 दिसंबर को देवभोज में न्योली, थरमाण, बराधा, जगोट, जुआणी, प्रेमगढ़, शांगरीबाग, त्राबंली, किंजा, माहिली, महाराजा, बारी ओडीधार, घराकड़ के हारियान और भक्त के अलावा कुल्लू के दूरदराज के श्रद्धालु भाग लेंगे।
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