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सूखे से टमाटर की 65 फीसदी फसल बरबाद
Updated Tue, 26 Jun 2018 09:52 PM IST
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सूखे से टमाटर की 65
फीसदी फसल बरबाद
किसानों का खेती पर किया खर्चा भी नहीं हो रहा पूरा
मुश्किल में अनदाता, सरकार से की मुआवजे की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। मौसम की बेरुखी इस साल कृषि और बागवानी पर भारी पड़ रही है। नकदी फसल टमाटर सूखे के कहर से क्षतिग्रस्त हो गई। फसल की बरबादी से किसानों का खेती पर किया हुआ खर्चा भी पूरा नहीं हो रहा है। ऐसे किसान बैकफुट पर आ गए हैं।
जिला कुल्लू में गत सात सालों से बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती किसान कर रहे हैं। जिला कुल्लू में 1500 हेक्टेयर भूमि पर टमाटर का उत्पादन हो रहा है। इस का व्यापार करोड़ में जिला में होता है लेकिन इस साल सूखे के चलते उत्पादन घटने की आशंका जाहिर की जा रही है। मार्च माह में रोपित टमाटर के पौधे समय पर बारिश न होने से विकसित नहीं हो पाए हैं। वहीं, सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी के कारण प्राकृतिक स्रोतों और नालों में पानी की मात्रा बहुत कम होने से जिला के कई क्षेत्रों में सिंचाई पानी के अभाव में वक्त पर नहीं हो सकी। ऐसे में किसान की टमाटर की फसल करीब 65 फीसदी सूखे की जद में आने से बरबाद को चुकी है अगर समय पर मानसून नहीं आया तो बचे हुए पौधे भी सूखे की चपेट में आकर सूख जाएंगे।
किसान अमित कुमार, चमन, दवेंद्र, सतीश ठाकुर, खराहल के नंबरदार अशोक ठाकुर, सुनू राम, मोहर सिंह, ज्ञान ठाकुर, चंदेराम, युवराज कुमार और संजीव शर्मा आदि का कहना है कि इस साल समय-समय पर बारिश नहीं होने से खेतों में ही टमाटर के पौधे सूख गए हैं। किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी के अनुसार इस साल सूखे के कारण करीब 65 प्रतिशत टमाटर अन्य नकदी फसलें बरबाद हो गई हैं। उन्होंने सरकार से नुकसान का मुआवजा मुहैया करवाने की गुहार लगाई है।
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इस वर्ष मौसम की बेरुखी के कारण टमाटर और अन्य नकदी फसलों को काफी नुकसान पहुंचने की सूचना है। विभाग फील्ड के स्टाफ से इसकी जानकारी मुहैया करेगा। इस साल सूखे से जिला में नकदी फसल टमाटर को काफी नुकसान हुआ है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा है वहां नुकसान में कमी आई है। - रत्न भारद्वाज, कृषि उपनिदेशक कुल्लू
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फीसदी फसल बरबाद
किसानों का खेती पर किया खर्चा भी नहीं हो रहा पूरा
मुश्किल में अनदाता, सरकार से की मुआवजे की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। मौसम की बेरुखी इस साल कृषि और बागवानी पर भारी पड़ रही है। नकदी फसल टमाटर सूखे के कहर से क्षतिग्रस्त हो गई। फसल की बरबादी से किसानों का खेती पर किया हुआ खर्चा भी पूरा नहीं हो रहा है। ऐसे किसान बैकफुट पर आ गए हैं।
जिला कुल्लू में गत सात सालों से बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती किसान कर रहे हैं। जिला कुल्लू में 1500 हेक्टेयर भूमि पर टमाटर का उत्पादन हो रहा है। इस का व्यापार करोड़ में जिला में होता है लेकिन इस साल सूखे के चलते उत्पादन घटने की आशंका जाहिर की जा रही है। मार्च माह में रोपित टमाटर के पौधे समय पर बारिश न होने से विकसित नहीं हो पाए हैं। वहीं, सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी के कारण प्राकृतिक स्रोतों और नालों में पानी की मात्रा बहुत कम होने से जिला के कई क्षेत्रों में सिंचाई पानी के अभाव में वक्त पर नहीं हो सकी। ऐसे में किसान की टमाटर की फसल करीब 65 फीसदी सूखे की जद में आने से बरबाद को चुकी है अगर समय पर मानसून नहीं आया तो बचे हुए पौधे भी सूखे की चपेट में आकर सूख जाएंगे।
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किसान अमित कुमार, चमन, दवेंद्र, सतीश ठाकुर, खराहल के नंबरदार अशोक ठाकुर, सुनू राम, मोहर सिंह, ज्ञान ठाकुर, चंदेराम, युवराज कुमार और संजीव शर्मा आदि का कहना है कि इस साल समय-समय पर बारिश नहीं होने से खेतों में ही टमाटर के पौधे सूख गए हैं। किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी के अनुसार इस साल सूखे के कारण करीब 65 प्रतिशत टमाटर अन्य नकदी फसलें बरबाद हो गई हैं। उन्होंने सरकार से नुकसान का मुआवजा मुहैया करवाने की गुहार लगाई है।
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इस वर्ष मौसम की बेरुखी के कारण टमाटर और अन्य नकदी फसलों को काफी नुकसान पहुंचने की सूचना है। विभाग फील्ड के स्टाफ से इसकी जानकारी मुहैया करेगा। इस साल सूखे से जिला में नकदी फसल टमाटर को काफी नुकसान हुआ है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा है वहां नुकसान में कमी आई है। - रत्न भारद्वाज, कृषि उपनिदेशक कुल्लू