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Kangra News: कुकुमसेरी में हो रही राजमाश की 4000 किस्मों का परीक्षण

Sun, 06 Sep 2026 07:41 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Sun, 06 Sep 2026 07:41 AM IST
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Testing of 4,000 varieties of Rajmash underway in Kukumseri.
कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी में कार्यक्रम के दौरान किसान को सम्मानित करते अधिकारी। -स्रोत : स
पालमपुर (कांगड़ा)। देशभर से जुटाई गईं राजमाश की करीब 4,000 उन्नत किस्मों का कृषि विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र कुकुमसेरी (लाहौल-स्पीति) में परीक्षण चल रहा है। अनुसंधान केंद्र में इनके गहन मूल्यांकन का कार्य जारी है। परीक्षण में जो किस्में सबसे बेहतर और उच्च गुणवत्ता वाली साबित होंगी, उन्हें भविष्य में स्थानीय किसानों को खेती के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा।
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यह जानकारी परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. राकेश छाहोटा ने शनिवार को दी। वे जनजातीय उप-योजना के तहत आयोजित खेत दिवस कार्यक्रम में किसानों को संबोधित कर रहे थे। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के अधीन आयोजित इस कार्यक्रम में लाहौल घाटी के करीब 100 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुभाष कुमार और विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. विनोद शर्मा सहित वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने किया। समारोह में एनबीपीजीआर-आईसीएआर नई दिल्ली की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पद्मावती गणपत गोरे ने बतौर विशेष अतिथि शिरकत की। उन्होंने किसानों से क्षेत्र की पारंपरिक फसलों व किस्मों को संरक्षित करने का आह्वान किया। साथ ही विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए इन किस्मों को केंद्र को उपलब्ध करवाने पर जोर दिया। इस दौरान वैज्ञानिक डॉ. जोगिंद्र पाल, डॉ. शैल्जा शर्मा, डॉ. नेहा शर्मा और डॉ. आशिता बिष्ट ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़ी तकनीकी जानकारियां किसानों के साथ साझा कीं। डॉ. प्रदीप कुमार ने लाहौल घाटी में फसल विविधीकरण की जरूरत पर बल दिया।
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उन्होंने बताया कि आधुनिक पैकेजिंग और बेहतर विपणन के जरिए किसान अपनी उपज का उचित मूल्य कैसे हासिल कर सकते हैं। अंत में कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुभाष कुमार ने केंद्र में चल रही विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों का ब्योरा रखा और किसानों की समस्याएं सुनकर उनका समाधान सुझाया।
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