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पर्यटन कारोबार को उभारने में असफल रहा रोपवे और बर्फवारी

Sun, 13 Feb 2022 12:09 AM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 12:09 AM IST
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Ropeway and snowfall failed to revive tourism business
धर्मशाला। प्रदेश के सबसे पड़े पर्यटन कारोबार को उबारने में शरद ऋतु भी असफल रही है। इसके अलावा 207 करोड़ की लागत से स्थापित धर्मशाला रोपवे के साथ-साथ तीन बार नड्डी और डल झील में हुआ हिमपात भी बाहरी राज्यों के पर्यटकों को आकर्षित करने में असमर्थ रहा है।
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वहीं कोरोना को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार की ओर से लगाई गई बंदिशें भी कहीं न कहीं पर्यटन कारोबार में आड़े आई हैं। बात करें धर्मगुरु दलाईलामा, जो विश्वभर में प्रसिद्ध हैं और लाखों की तादाद में लोग उनसे मिलने आते हैं, लेकिन कोरोना काल के समय से दलाईलामा मंदिर बंद होना, देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों की कमी का बड़ा कारण माना जा रहा है।
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क्रिसमस और नए साल में होटल और पर्यटन कारोबारियों के लिए थोड़ी राहत लेकर आया था। मगर उसके बाद से पर्यटन नगरी मैक्लोडंगज डेढ़ माह से खाली पड़ी हुई है। इक्का-दुक्का पर्यटकों से ही कारोबारियों को काम चलाना पड़ा रहा है। नए साल के बाद से अभी तक पर्यटन नगरी के होटलों में ऑक्यूपेंसी 15 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ पाई है। इस कारण होटल कारोबारियों के चेहरे मायूस नजर आ रहे हैं। वहीं, अब इन कारोबारियों को लाखों रुपये के लोन चुकाने की भी चिंता सताने लगी है। वहीं कारोबारियों की मानें तो प्रदेश सरकार ने कोरोना काल में हर वर्ग को राहत दी है। मगर प्रदेश की आय में सबसे अधिक बढ़ोतरी करने वाले पर्यटन कारोबार पर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। दो वर्षों में न तो सरकार ने बिजली-पानी के बिल माफ किए और न ही कोई अन्य प्रकार की राहत प्रदेश सरकार की ओर से मिल पाई।
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रोपवे को मैक्लोडगंज से त्रियुंड तक जोड़े सरकार : बांबा
अगर पर्यटन नगरी धर्मशाला में कारोबार और सैलानियों की संख्या को बढ़ाना है तो सरकार को रोपवे धर्मशाला के मैक्लोडगंज से त्रियुंड तक जोड़ने की जरूरत है। इससे पर्यटन कारोबार को पंख लगेंगे और पर्यटक अधिक समय यहां पर बिता सकेंगे। इसके अलावा सरकार को अन्य पर्यटन स्थलों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। - अश्विनी बांबा, अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन धर्मशाला

डेढ़ माह से पर्यटन नगरी हो गई खाली : गांधी
पर्यटन नगरी में डेढ़ माह से सैलानी न आने से कारोबार ठप पड़ गया है। इस समय पर्यटन नगरी खाली है। वीकेंड पर भी पर्यटक धर्मशाला घूमने नहीं आ रहे हैं। हर वीकेंड ऑक्यूपेंसी 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो पा रही है। - संजीव गांधी, महासचिव, स्मार्ट सिटी होटल एसोसिएशन धर्मशाला
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