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लंबित मुकदमे में व्यक्तिगत आजादी सीमित रखना उचित नहीं : सीजेएम
Wed, 02 Sep 2026 09:19 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 02 Sep 2026 09:19 AM IST
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धर्मशाला। किसी आपराधिक मुकदमे के लंबित रहने के दौरान आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लंबे समय तक प्रतिबंधित रखना न्यायहित में उचित नहीं है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कांगड़ा स्थित धर्मशाला डॉ. हकीकत ढांडा की अदालत ने यह अहम टिप्पणी करते हुए एक मामले के आरोपी को तीन वर्ष की अवधि के लिए पासपोर्ट बनवाने की अनुमति प्रदान कर दी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रायल के निपटारे में लंबा समय लगने की संभावना को देखते हुए युवा आरोपी की स्वतंत्रता पर लंबी रोक नहीं लगाई जा सकती। आरोपी ने अदालत में आवेदन देकर कहा था कि वह वैध उद्देश्य के लिए पासपोर्ट बनवाना चाहता है और उसने कभी न्यायालय द्वारा दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया है।
उसने आवश्यक बॉन्ड प्रस्तुत करने का भी भरोसा दिया। वहीं, राज्य पक्ष ने भी आवेदन पर कोई आपत्ति नहीं जताई। अभियोजन ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट जारी होना पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और संबंधित नियमों के अधीन रहेगा तथा इससे मामले के गुण-दोष पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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रिकॉर्ड के अनुसार थाना धर्मशाला में अगस्त 2025 में दर्ज भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 62, 64, 74, 75, 76 और 115(2) सहपठित धारा 3(5) के मामले के कारण क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय शिमला ने आरोपी का पासपोर्ट रोक रखा था। अदालत ने पाया कि मामला अभी चालान व दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध करवाने के शुरुआती चरण में है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आवेदन स्वीकार कर आरोपी को तीन साल के लिए पासपोर्ट जारी करवाने की मंजूरी दे दी।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रायल के निपटारे में लंबा समय लगने की संभावना को देखते हुए युवा आरोपी की स्वतंत्रता पर लंबी रोक नहीं लगाई जा सकती। आरोपी ने अदालत में आवेदन देकर कहा था कि वह वैध उद्देश्य के लिए पासपोर्ट बनवाना चाहता है और उसने कभी न्यायालय द्वारा दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया है।
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उसने आवश्यक बॉन्ड प्रस्तुत करने का भी भरोसा दिया। वहीं, राज्य पक्ष ने भी आवेदन पर कोई आपत्ति नहीं जताई। अभियोजन ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट जारी होना पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और संबंधित नियमों के अधीन रहेगा तथा इससे मामले के गुण-दोष पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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रिकॉर्ड के अनुसार थाना धर्मशाला में अगस्त 2025 में दर्ज भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 62, 64, 74, 75, 76 और 115(2) सहपठित धारा 3(5) के मामले के कारण क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय शिमला ने आरोपी का पासपोर्ट रोक रखा था। अदालत ने पाया कि मामला अभी चालान व दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध करवाने के शुरुआती चरण में है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आवेदन स्वीकार कर आरोपी को तीन साल के लिए पासपोर्ट जारी करवाने की मंजूरी दे दी।