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मेहमान परिंदों से पौंग झील गुलजार
रक्षपाल धीमान/ अमर उजाला, नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)।
Updated Mon, 14 Dec 2015 11:02 PM IST
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मौसम में ठंडक होते ही पौंग झील में प्रवासी पक्षियों
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की आमद में भी इजाफा होना शुरू हो गया है। आजकल पौंग झील में देश-विदेश से
सैकड़ों पक्षियों की चहचहाहट सुनी जा सकती है।
अक्तूबर से मार्च तक साइबेरिया, रूस और चीन आदि सुदूर देशों से हजारों मील का सफर तय कर प्रवासी पक्षी पौंग झील में सैलानियों को रोमांचित करते हैं।
नगरोटा सूरियां के पास पौंग झील प्रवासी पक्षियों के जमघट का प्रमुख स्थल है।
प्रवासी पक्षियों की रौनक बढ़ने के साथ ही नगरोटा सूरियां में पर्यटकों की आमद में भी इजाफा होने लगा है। आस्ट्रेलिया से यहां घूमने आए जोआव व सालीना का कहना है कि पौंग झील की सुदरता और प्रवासी पक्षियों की कलोलें उनको भा गई हैं।
लेकिन धर्मशाला से नगरोटा सूरियां तक सड़क मार्ग की खस्ताहालत और नगरोटा सूरियां में खान-पान सहित ठहरने का उचित प्रबंध नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
उधर, वन्यप्राणी विभाग प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सजग है और हर महीने इनकी गणना करता रहता है।
वन्य प्राणी संरक्षण विभाग के सहायक अरण्यपाल डीएस डढवाल का कहना है कि अभी तक पौंग झील में 85 प्रजातियों के एक लाख से भी अधिक प्रवासी पक्षी पहुंच चुके हैं और सर्दियां बढ़ने के साथ ही ये आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। मुख्य गणना जनवरी महीने में की जाएगी।
अक्तूबर से मार्च तक साइबेरिया, रूस और चीन आदि सुदूर देशों से हजारों मील का सफर तय कर प्रवासी पक्षी पौंग झील में सैलानियों को रोमांचित करते हैं।
नगरोटा सूरियां के पास पौंग झील प्रवासी पक्षियों के जमघट का प्रमुख स्थल है।
प्रवासी पक्षियों की रौनक बढ़ने के साथ ही नगरोटा सूरियां में पर्यटकों की आमद में भी इजाफा होने लगा है। आस्ट्रेलिया से यहां घूमने आए जोआव व सालीना का कहना है कि पौंग झील की सुदरता और प्रवासी पक्षियों की कलोलें उनको भा गई हैं।
लेकिन धर्मशाला से नगरोटा सूरियां तक सड़क मार्ग की खस्ताहालत और नगरोटा सूरियां में खान-पान सहित ठहरने का उचित प्रबंध नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
उधर, वन्यप्राणी विभाग प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सजग है और हर महीने इनकी गणना करता रहता है।
वन्य प्राणी संरक्षण विभाग के सहायक अरण्यपाल डीएस डढवाल का कहना है कि अभी तक पौंग झील में 85 प्रजातियों के एक लाख से भी अधिक प्रवासी पक्षी पहुंच चुके हैं और सर्दियां बढ़ने के साथ ही ये आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। मुख्य गणना जनवरी महीने में की जाएगी।