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Kangra News: सरकारी ‘शगुन’ का सूखा, खाते देख रहीं बेटियां
Sun, 30 Aug 2026 01:57 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 30 Aug 2026 01:57 AM IST
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धर्मशाला। प्रदेश सरकार की योजनाओं में बजट के सूखे के चलते पात्र बेटियों और महिलाओं को आर्थिक मदद के नाम पर केवल इंतजार हाथ लग रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री शगुन और कन्यादान जैसी प्रमुख योजनाओं के तहत कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद पिछले चार महीनों से सहायता राशि लाभार्थियों के खातों में नहीं पहुंची है।
आलम यह है कि सरकारी शगुन की आस लगाए बेटियां और उनके परिजन लगातार बैंक खातों के पैसे आने के संदेश देख रही हैं। कांगड़ा जिले में बजट के अभाव के कारण कल्याणकारी योजनाओं की फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। जिले में मुख्यमंत्री शगुन योजना के तहत 395, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में 139, इंदिरा गांधी सुख सुरक्षा योजना में 53 और विधवा पुनर्विवाह योजना में आठ आवेदन लंबित पड़े हैं।
आवश्यक दस्तावेज जमा होने के बाद निर्धारित समय पर मदद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन चार माह बीत जाने पर भी एक पाई जारी नहीं हुई। बजट की कमी से इन योजनाओं का धरातल पर दम निकल रहा है, जिससे गरीब परिवारों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा पोषित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत जिले में 3,409 लाभार्थियों को राहत मिली है।
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इसके अलावा राज्य की सुख शिक्षा और सुख आश्रय योजना को ही नियमित बजट मिल पा रहा है। परेशान लाभार्थियों ने सरकार से गुहार लगाई है कि बजट तुरंत जारी कर उनके खातों में लंबित राशि ट्रांसफर की जाए।
केंद्र की ओर से संचालित योजनाओं में महिलाओं को लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना और मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत भी लगातार बजट का आवंटन किया जा रहा है। -अशोक कुमार शर्मा, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग कांगड़ा
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आलम यह है कि सरकारी शगुन की आस लगाए बेटियां और उनके परिजन लगातार बैंक खातों के पैसे आने के संदेश देख रही हैं। कांगड़ा जिले में बजट के अभाव के कारण कल्याणकारी योजनाओं की फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। जिले में मुख्यमंत्री शगुन योजना के तहत 395, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में 139, इंदिरा गांधी सुख सुरक्षा योजना में 53 और विधवा पुनर्विवाह योजना में आठ आवेदन लंबित पड़े हैं।
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आवश्यक दस्तावेज जमा होने के बाद निर्धारित समय पर मदद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन चार माह बीत जाने पर भी एक पाई जारी नहीं हुई। बजट की कमी से इन योजनाओं का धरातल पर दम निकल रहा है, जिससे गरीब परिवारों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा पोषित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत जिले में 3,409 लाभार्थियों को राहत मिली है।
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इसके अलावा राज्य की सुख शिक्षा और सुख आश्रय योजना को ही नियमित बजट मिल पा रहा है। परेशान लाभार्थियों ने सरकार से गुहार लगाई है कि बजट तुरंत जारी कर उनके खातों में लंबित राशि ट्रांसफर की जाए।
केंद्र की ओर से संचालित योजनाओं में महिलाओं को लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना और मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत भी लगातार बजट का आवंटन किया जा रहा है। -अशोक कुमार शर्मा, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग कांगड़ा