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Kangra News: चेक बाउंस के दोषी को सुनाई दो साल की सजा, 54 हजार जुर्माना
Tue, 08 Sep 2026 09:15 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 08 Sep 2026 09:15 AM IST
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धर्मशाला। चेक बाउंस के करीब साढ़े 12 साल पुराने मामले में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी-द्वितीय धर्मशाला डॉ. पार्थ जैन की अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया है। दोषी को दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 54 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जो शिकायतकर्ता को बतौर मुआवजा दिया जाएगा।
जुर्माना न भरने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। जिला मुख्यालय के समीपवर्ती क्षेत्र के निवासी शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई थी कि क्षेत्र के ही एक लकड़ी व्यापारी ने उनसे पुरानी मशीन 27 हजार रुपये में खरीदी थी। इस सौदे के भुगतान के लिए आरोपी ने 17 जनवरी 2014 को 27 हजार रुपये का चेक दिया था, जो 21 फरवरी 2014 को बैंक में पर्याप्त राशि न होने और हस्ताक्षर अलग मिलने के कारण बाउंस हो गया था।
इसके बाद 14 मार्च 2014 को कानूनी नोटिस भेजने पर भी जब भुगतान नहीं हुआ, तो मामला अदालत में पहुंचा। सुनवाई के दौरान आरोपी ने मशीन खरीदने और चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात तो स्वीकार की, लेकिन इसे सुरक्षा के तौर पर दिया गया चेक बताया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सुरक्षा चेक होने का दावा वैधानिक देनदारी को खत्म नहीं करता और आरोपी इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। सभी तथ्यों को परखने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।
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जुर्माना न भरने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। जिला मुख्यालय के समीपवर्ती क्षेत्र के निवासी शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई थी कि क्षेत्र के ही एक लकड़ी व्यापारी ने उनसे पुरानी मशीन 27 हजार रुपये में खरीदी थी। इस सौदे के भुगतान के लिए आरोपी ने 17 जनवरी 2014 को 27 हजार रुपये का चेक दिया था, जो 21 फरवरी 2014 को बैंक में पर्याप्त राशि न होने और हस्ताक्षर अलग मिलने के कारण बाउंस हो गया था।
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इसके बाद 14 मार्च 2014 को कानूनी नोटिस भेजने पर भी जब भुगतान नहीं हुआ, तो मामला अदालत में पहुंचा। सुनवाई के दौरान आरोपी ने मशीन खरीदने और चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात तो स्वीकार की, लेकिन इसे सुरक्षा के तौर पर दिया गया चेक बताया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सुरक्षा चेक होने का दावा वैधानिक देनदारी को खत्म नहीं करता और आरोपी इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। सभी तथ्यों को परखने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।
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