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Kangra News: जल विसर्जन नहीं, मंदिर में विराजे भगवान गणेश
Mon, 21 Sep 2026 08:30 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 21 Sep 2026 08:30 AM IST
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कांगडा में गणेश विसर्जन के लिए जाते श्रद्धालु । जागरूक पाठक
नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। गणेश उत्सव के समापन पर इस बार प्रतिमा का जल विसर्जन नहीं किया गया, बल्कि प्रथम पूज्य भगवान गणेश को विधि-विधान के साथ हनुमान मंदिर नगरोटा में स्थायी रूप से स्थापित किया गया। पिछले 19 वर्षों से चली आ रही जल विसर्जन की परिपाटी को बदलते हुए श्रद्धालुओं ने यह नई शुरुआत की है।
इस फैसले से क्षेत्र में धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल कायम हुई है। उत्सव के समापन पर नगरोटा में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस दौरान गणेश उत्सव मंडल के सदस्य नीरज दुसेजा, शीला दुसेजा, बिट्टू बालिया, सीमा दुसेजा, मीरा और सुमन शर्मा सहित अन्य भक्त गणपति के भजनों पर जमकर थिरके।
देवभूमि हिमाचल में देवी-देवताओं को हमेशा स्थायी रूप से विराजमान करने की परंपरा रही है। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान गणेश की उपस्थिति हिमालयी क्षेत्र में सर्वत्र है, इसलिए उन्हें अपने क्षेत्र से जल में विदा (विसर्जित) करने के बजाय मंदिर में स्थायी रूप से स्थापित करना अधिक श्रेयस्कर है।
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कांगड़ा के सराफा बाजार की प्रतिमा भी की स्थापित
कांगड़ा। सराफा बाजार में एक सप्ताह से जारी गणेश उत्सव रविवार को संपन्न हो गया। सुबह विश्व शांति और जनकल्याण के लिए आयोजित हवन यज्ञ में स्थानीय व्यापारियों ने पूर्णाहूति डाली। दोपहर बाद रंग-गुलाल उड़ाते हुए भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसके बाद सराफा बाजार की गणेश प्रतिमा को खड्ड में विसर्जित करने के बजाय स्थानीय शिव मंदिर में विधिपूर्वक स्थापित किया गया। वहीं, झाड़ू महादेव मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा का बनेर खड्ड में विधिवत विसर्जन किया गया।
कोटला में सरकार के आदेश पर नहीं हुआ जल प्रवाह
कोटला (कांगड़ा)। सामुदायिक भवन कोटला में आयोजित गणेश चतुर्थी उत्सव धूमधाम से संपन्न हुआ। शनिवार को विशाल भंडारे के बाद रविवार को उत्सव का समापन हुआ। प्रदेश सरकार के पर्यावरण-हितैषी निर्देशों का पालन करते हुए इस बार प्रतिमा को जल में प्रवाहित नहीं किया गया, बल्कि विधिवत पूजा के बाद कोटला स्थित शिव मंदिर में स्थापित किया गया। आयोजन को सफल बनाने में महिला मंडल कोटला की प्रधान पूनम देवी और सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
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इस फैसले से क्षेत्र में धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल कायम हुई है। उत्सव के समापन पर नगरोटा में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस दौरान गणेश उत्सव मंडल के सदस्य नीरज दुसेजा, शीला दुसेजा, बिट्टू बालिया, सीमा दुसेजा, मीरा और सुमन शर्मा सहित अन्य भक्त गणपति के भजनों पर जमकर थिरके।
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देवभूमि हिमाचल में देवी-देवताओं को हमेशा स्थायी रूप से विराजमान करने की परंपरा रही है। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान गणेश की उपस्थिति हिमालयी क्षेत्र में सर्वत्र है, इसलिए उन्हें अपने क्षेत्र से जल में विदा (विसर्जित) करने के बजाय मंदिर में स्थायी रूप से स्थापित करना अधिक श्रेयस्कर है।
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कांगड़ा के सराफा बाजार की प्रतिमा भी की स्थापित
कांगड़ा। सराफा बाजार में एक सप्ताह से जारी गणेश उत्सव रविवार को संपन्न हो गया। सुबह विश्व शांति और जनकल्याण के लिए आयोजित हवन यज्ञ में स्थानीय व्यापारियों ने पूर्णाहूति डाली। दोपहर बाद रंग-गुलाल उड़ाते हुए भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसके बाद सराफा बाजार की गणेश प्रतिमा को खड्ड में विसर्जित करने के बजाय स्थानीय शिव मंदिर में विधिपूर्वक स्थापित किया गया। वहीं, झाड़ू महादेव मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा का बनेर खड्ड में विधिवत विसर्जन किया गया।
कोटला में सरकार के आदेश पर नहीं हुआ जल प्रवाह
कोटला (कांगड़ा)। सामुदायिक भवन कोटला में आयोजित गणेश चतुर्थी उत्सव धूमधाम से संपन्न हुआ। शनिवार को विशाल भंडारे के बाद रविवार को उत्सव का समापन हुआ। प्रदेश सरकार के पर्यावरण-हितैषी निर्देशों का पालन करते हुए इस बार प्रतिमा को जल में प्रवाहित नहीं किया गया, बल्कि विधिवत पूजा के बाद कोटला स्थित शिव मंदिर में स्थापित किया गया। आयोजन को सफल बनाने में महिला मंडल कोटला की प्रधान पूनम देवी और सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

कांगडा में गणेश विसर्जन के लिए जाते श्रद्धालु । जागरूक पाठक