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पेखुवाला प्रोजेक्ट के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता : बिक्रम

Thu, 07 Aug 2025 11:56 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Aug 2025 11:56 PM IST
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Pekhuwala project once again under question
पेखुवाला प्रोजेक्ट एक बार फिर सवालों के घेरे में
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विधायक बिक्रम ठाकुर ने की निष्पक्ष जांच की मांग
देहरा (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में करोड़ों रुपये की लागत से बना पेखुवाला हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। पूर्व मंत्री एवं विधायक बिक्रम ठाकुर ने इस परियोजना से जुड़ी अनियमितताओं और ठेकेदार कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि दो अगस्त को ऊना में हुई भारी बारिश के कारण पेखुवाला प्लांट पूरी तरह पानी में डूब गया। इससे प्लांट को बंद करना पड़ा। यह घटना केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि लापरवाही और तकनीकी कुप्रबंधन का परिणाम है। जिस कंपनी को निर्माण कार्य सौंपा गया था, उसे आठ माह तक प्लांट की मरम्मत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस शर्त की पूरी तरह अनदेखी की गई। प्लांट से 32 मेगावाट बिजली उत्पादन होना था। अब उत्पादन घटकर 16 मेगावाट रह गया है। यह दर्शाता है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता हुआ है।

जिस ड्रेनेज सिस्टम की जरूरत थी, वह कभी बनाया ही नहीं गया। इससे पूरा प्लांट जलमग्न हो गया। जब प्रोजेक्ट अधूरा था तो ठेकेदार को 99 प्रतिशत भुगतान किस आधार पर कर दिया गया। इस प्रोजेक्ट की डीपीआर महज 15 दिन में तैयार की गई थी और उसे जांचे बिना ही कार्य आरंभ कर दिया गया जो एक गंभीर चूक है। दिवंगत अधिकारी विमल नेगी इस भुगतान के पक्ष में नहीं थे, क्योंकि उन्हें प्रोजेक्ट की पारदर्शिता पर शंका थी। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 100 करोड़ रुपये थी, लेकिन यह बढ़कर 240 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके पीछे किसकी भूमिका रही, इसकी जांच होनी चाहिए। जब गुजरात में इसी तरह का प्लांट 70 करोड़ रुपये में बन गया तो हिमाचल में लागत तीन गुना क्यों बढ़ी। यह सब कुछ सरकार की सहमति और संरक्षण में हुआ है। इस पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी अधिकारी या ठेकेदार दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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