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Kangra News: रिश्वत लेने के दोषी पटवारी को चार वर्ष का कठोर कारावास
Thu, 20 Mar 2025 12:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 20 Mar 2025 12:54 AM IST
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धर्मशाला। जमाबंदी और अक्ष सजरा की प्रतियां उपलब्ध करवाने की एवज में एक हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए पटवारी के खिलाफ आरोप सिद्ध होने पर न्यायालय ने दोषी को चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी को 30 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह फैसला धर्मशाला स्थित विशेष न्यायाधीश एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश चौहान की अदालत ने सुनाया है।
जानकारी के अनुसार 17 जून 2014 को शिकायतकर्ता संतोष कुमार निवासी भडवाल ने राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो धर्मशाला के पुलिस अधीक्षक को एक लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में बताया था कि पटवार सर्किल मंदल का पटवारी राजू उनसे एक हजार रुपये जमाबंदी और अक्ष सजरा की प्रतियां उपलब्ध करवाने की एवज में मांग रहा है। यह दस्तावेज शिकायतकर्ता को सीमांकन प्रक्रिया के लिए आवश्यक थे, जिसके बाद शिकायत के आधार पर पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार इंस्पेक्टर चमन लाल भाटिया के नेतृत्व में पटवारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया। शिकायतकर्ता को आरोपी से संपर्क करने के लिए कहा गया और जब शिकायतकर्ता ने पटवारी राजू से संपर्क किया, तो उसने धर्मशाला स्थित एक ढाबा में मिलने के लिए बुलाया और रिश्वत की राशि लेकर आने को कहा।
शिकायतकर्ता ने जैसे ही एक हजार रुपये रिश्वत आरोपी को सौंपी तो विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। पटवारी की टी-शर्ट की जेब से रिश्वत की राशि बरामद की गई। इस मामले में सुनवाई के बाद बुधवार को अदालत ने आरोपी पटवारी को दोषी ठहराते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत दोषी मानते हुए तीन साल के कठोर कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माना और जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा, धारा 13(2) के तहत चार साल के कठोर कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। इस जुर्माने का भुगतान न करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस केस की पैरवी देवेंद्र चौधरी जिला न्यायवादी, सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो धर्मशाला ने की।
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जानकारी के अनुसार 17 जून 2014 को शिकायतकर्ता संतोष कुमार निवासी भडवाल ने राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो धर्मशाला के पुलिस अधीक्षक को एक लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में बताया था कि पटवार सर्किल मंदल का पटवारी राजू उनसे एक हजार रुपये जमाबंदी और अक्ष सजरा की प्रतियां उपलब्ध करवाने की एवज में मांग रहा है। यह दस्तावेज शिकायतकर्ता को सीमांकन प्रक्रिया के लिए आवश्यक थे, जिसके बाद शिकायत के आधार पर पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार इंस्पेक्टर चमन लाल भाटिया के नेतृत्व में पटवारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया। शिकायतकर्ता को आरोपी से संपर्क करने के लिए कहा गया और जब शिकायतकर्ता ने पटवारी राजू से संपर्क किया, तो उसने धर्मशाला स्थित एक ढाबा में मिलने के लिए बुलाया और रिश्वत की राशि लेकर आने को कहा।
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शिकायतकर्ता ने जैसे ही एक हजार रुपये रिश्वत आरोपी को सौंपी तो विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। पटवारी की टी-शर्ट की जेब से रिश्वत की राशि बरामद की गई। इस मामले में सुनवाई के बाद बुधवार को अदालत ने आरोपी पटवारी को दोषी ठहराते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत दोषी मानते हुए तीन साल के कठोर कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माना और जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा, धारा 13(2) के तहत चार साल के कठोर कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। इस जुर्माने का भुगतान न करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस केस की पैरवी देवेंद्र चौधरी जिला न्यायवादी, सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो धर्मशाला ने की।
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