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अनियंत्रित खनन से हिमाचल के अस्तित्व को खतरा : सुदर्शन
Wed, 03 Sep 2025 08:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 03 Sep 2025 08:58 PM IST
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अनियंत्रित खनन से हिमाचल के अस्तित्व को खतरा : सुदर्शन
कहा, खनन माफिया पर अंकुश लगाना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
नूरपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश इस समय प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है। भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ से प्रदेश को अब तक करीब 15 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। यह बात कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सुदर्शन शर्मा ने प्रेसवार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की असली पहचान इसकी हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य है लेकिन अनियंत्रित खनन ने प्रदेश के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। पत्रकारों से भूमि कटाव और सड़क भूस्खलन से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि जब तक खनन माफिया पर सख्त अंकुश नहीं लगाया जाएगा, तब तक हिमाचल को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग के पास न तो चालान की शक्ति है और न ही अवैध खनन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने की ताकत है। विभाग केवल पुलिस को सूचना देने का माध्यम बनकर रह गया है। ऐसे में यह विभाग सरकार पर सफेद हाथी की तरह बोझ साबित हो रहा है। शर्मा ने सरकार से मांग की कि खनन विभाग के कानून में तुरंत संशोधन किया जाए और उच्चाधिकारियों को चालान की शक्तियां प्रदान की जाएं। साथ ही विभाग को पर्याप्त फील्ड स्टाफ भी उपलब्ध करवाया जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में हिमाचल की “हिमाचलियत” ही खतरे में पड़ सकती है।
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कहा, खनन माफिया पर अंकुश लगाना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
नूरपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश इस समय प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है। भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ से प्रदेश को अब तक करीब 15 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। यह बात कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सुदर्शन शर्मा ने प्रेसवार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की असली पहचान इसकी हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य है लेकिन अनियंत्रित खनन ने प्रदेश के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। पत्रकारों से भूमि कटाव और सड़क भूस्खलन से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि जब तक खनन माफिया पर सख्त अंकुश नहीं लगाया जाएगा, तब तक हिमाचल को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग के पास न तो चालान की शक्ति है और न ही अवैध खनन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने की ताकत है। विभाग केवल पुलिस को सूचना देने का माध्यम बनकर रह गया है। ऐसे में यह विभाग सरकार पर सफेद हाथी की तरह बोझ साबित हो रहा है। शर्मा ने सरकार से मांग की कि खनन विभाग के कानून में तुरंत संशोधन किया जाए और उच्चाधिकारियों को चालान की शक्तियां प्रदान की जाएं। साथ ही विभाग को पर्याप्त फील्ड स्टाफ भी उपलब्ध करवाया जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में हिमाचल की “हिमाचलियत” ही खतरे में पड़ सकती है।
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