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103 वर्ष के हुए चढियार के स्वतंत्रता सेनानी हरनाम सिंह
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100 बर्षीय छोटे भाई प्रेम सिंह अपने बड़े भाई स्वतंत्रता सेनानी हरनाम सिंह को जन्मदिन की बधाई देते ह
- फोटो : Kangra
चढियार (कांगड़ा)। चढियार पंचायत के गांव ननवाड़ के स्वतंत्रता सेनानी हरनाम सिंह रविवार को 103 साल के हो गए। उनके छोटे भाई सौ साल के प्रेम सिंह ने उन्हें हार पहनाकर बधाई दी। जन्मदिन पर गांव में खुशी का माहौल रहा और बधाइयों देने वालों का तांता लगा रहा।
हरनाम सिंह चढियार क्षेत्र में सबसे अधिक उम्र के स्वस्थ व्यक्ति हैं। हरनाम सिंह आजाद हिंद फौज के सिपाही रह चुके हैं और कई लड़ाइयों में दुश्मनों के छक्के छुड़ा चुके हैं। हरनाम सिंह का जन्म 23 जुलाई 1917 को सूरत सिंह के घर पर हुआ। हरनाम सिंह बचपन से ही बहुत होनहार थे, स्कूल घर से दूर होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई की व हमेशा अव्वल रहे। 1939 में सेना में भर्ती हुए थे। 18 साल तक सिग्नल आर्मी और 12 साल ग्रिफ में नौकरी करने के बाद 1977 में पेंशन आए। परिवार की अगर बात की जाए तो उनके तीन पुत्र, एक पुत्री व 12 पोते-पोतियां हैं। भारत की स्वतंत्रता में हरनाम सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी। गजब की बात तो यह है कि वह आज भी इतने चुस्त व फुर्तीले हैं कि रोज सुबह व शाम 10 किलोमीटर पैदल चलते हैं। हरनाम सिंह आज भी समाज के लिए कुछ कर गुजरना चाहते हैं। वह खुद अपना काम करते हैं।
स्थानीय निवासी सतीश राणा ने बताया कि ऐसे महान पुरुष हर जगह जन्म नहीं लेते हैं। उनके जन्म से हमारा गांव अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता है। हरनाम सिंह के जन्म दिन पर पृथी सिंह, प्रेम सिंह राणा, सहित पूरे चढियार वासियों ने बधाई दी व उनके मंगल स्वास्थ्य की कामना की।
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हरनाम सिंह चढियार क्षेत्र में सबसे अधिक उम्र के स्वस्थ व्यक्ति हैं। हरनाम सिंह आजाद हिंद फौज के सिपाही रह चुके हैं और कई लड़ाइयों में दुश्मनों के छक्के छुड़ा चुके हैं। हरनाम सिंह का जन्म 23 जुलाई 1917 को सूरत सिंह के घर पर हुआ। हरनाम सिंह बचपन से ही बहुत होनहार थे, स्कूल घर से दूर होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई की व हमेशा अव्वल रहे। 1939 में सेना में भर्ती हुए थे। 18 साल तक सिग्नल आर्मी और 12 साल ग्रिफ में नौकरी करने के बाद 1977 में पेंशन आए। परिवार की अगर बात की जाए तो उनके तीन पुत्र, एक पुत्री व 12 पोते-पोतियां हैं। भारत की स्वतंत्रता में हरनाम सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी। गजब की बात तो यह है कि वह आज भी इतने चुस्त व फुर्तीले हैं कि रोज सुबह व शाम 10 किलोमीटर पैदल चलते हैं। हरनाम सिंह आज भी समाज के लिए कुछ कर गुजरना चाहते हैं। वह खुद अपना काम करते हैं।
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स्थानीय निवासी सतीश राणा ने बताया कि ऐसे महान पुरुष हर जगह जन्म नहीं लेते हैं। उनके जन्म से हमारा गांव अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता है। हरनाम सिंह के जन्म दिन पर पृथी सिंह, प्रेम सिंह राणा, सहित पूरे चढियार वासियों ने बधाई दी व उनके मंगल स्वास्थ्य की कामना की।
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