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वन मंत्री से पूछा, सीएम के समक्ष क्यों नहीं उठाया फोरलेन प्रभावितों का मुद्दा
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नूरपुर स्थित मिनी सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे फोरलेन संघर्ष समिति के पदाधिकारी । संवाद
- फोटो : Kangra
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नूरपुर(कांगड़ा)। फोरलेन संघर्ष समिति के सदस्य प्रभावितों को उचित मुआवजा न मिलने पर बुधवार मिनी सचिवालय नूरपुर के बाहर एक दिन के सांकेतिक अनशन पर बैठे। फोरलेन संघर्ष समिति का समर्थन करने के लिए जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक अजय महाजन भी अनशन में पहुंचे। अजय महाजन ने कहा कि स्थानीय विधायक एवं वन मंत्री राकेश पठानिया फोरलेन प्रभावितों की मांग को सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।
यहां तक कि हाल ही में मुख्यमंत्री जयराम के नूरपुर आगमन पर भी फोरलेन प्रभावितों की मांगों को सीएम के समक्ष उठाना मुनासिब नहीं समझा। महाजन ने पठानिया से पूछा कि जनसभा में मंच पर जब क्षेत्र की अन्य मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रख रहे थे तो क्या पठानिया को फोरलेन प्रभावितों की याद तक नहीं आई। वन मंत्री कई बार फोरलेन प्रभावितों को आश्वासन के तौर पर एक प्रोजेक्ट एक रेट दिलाने का वादा कर चुके हैं, लेकिन इस मुद्दे पर कभी भी सरकार के समक्ष आवाज नहीं उठाई। इतना ही नहीं, फोरलेन प्रभावितों को न्याय दिलाने के लिए सरकार की ओर से गठित की गई उप कमेटी में पठानिया भी सदस्य हैं, लेकिन फोरलेन प्रभावितों को अभी तक न्याय नहीं मिला है।
समिति ने सरकार के समक्ष रखीं ये मांगें
प्रथम चरण के फोरलेन प्रभावितों को भू-अर्जन अधिकारी नूरपुर की ओर से अवार्ड नंबर 1 और अवार्ड नंबर दो के तहत किए गए मुआवजे का अंतर बिना आर्बिटेशन के बराबर किया जाए। भवन मुआवजे में पूरे भवन का मुआवजा दिया जाए, जबकि एनएचएआई की ओर से उतने ही भवन का मुआवजा दिया जा रहा है, जितना फोरलेन की जद में आ रहा है, जो कि अन्यायपूर्ण है। यह प्रभावितों को अस्वीकार है। प्रथम चरण के फोरलेन प्रभावितों को भू अर्जन अधिकारी नूरपुर की ओर से अधिग्रहीत की गई भूमि और भवनों के अवार्ड पत्र भूमि और मकान का नक्शा और राशि की विस्तृत जानकारी प्रत्येक प्रभावित के पते पर उपलब्ध कराई जाए। भू अधिग्रहण कानून 2013 को अतिशीघ्र लागू किया जाए। भू अर्जन अधिकारी नूरपुर की ओर से प्रभावितों को जो 60 दिन का नोटिस दिया जा रहा है, उसे तब तक निरस्त किया जाए जब तक प्रथम और द्वितीय अवार्ड की राशि का अंतर पूरा नहीं किया जाता। इस अवसर पर फोरलेन समिति के अध्यक्ष दरबारी सिंह, उपाध्यक्ष सुदर्शन शर्मा, सचिव बीपी बक्शी, डॉ. अशोक शर्मा, कर्नल दीपक पठानिया आदि मौजूद थे।
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यहां तक कि हाल ही में मुख्यमंत्री जयराम के नूरपुर आगमन पर भी फोरलेन प्रभावितों की मांगों को सीएम के समक्ष उठाना मुनासिब नहीं समझा। महाजन ने पठानिया से पूछा कि जनसभा में मंच पर जब क्षेत्र की अन्य मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रख रहे थे तो क्या पठानिया को फोरलेन प्रभावितों की याद तक नहीं आई। वन मंत्री कई बार फोरलेन प्रभावितों को आश्वासन के तौर पर एक प्रोजेक्ट एक रेट दिलाने का वादा कर चुके हैं, लेकिन इस मुद्दे पर कभी भी सरकार के समक्ष आवाज नहीं उठाई। इतना ही नहीं, फोरलेन प्रभावितों को न्याय दिलाने के लिए सरकार की ओर से गठित की गई उप कमेटी में पठानिया भी सदस्य हैं, लेकिन फोरलेन प्रभावितों को अभी तक न्याय नहीं मिला है।
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समिति ने सरकार के समक्ष रखीं ये मांगें
प्रथम चरण के फोरलेन प्रभावितों को भू-अर्जन अधिकारी नूरपुर की ओर से अवार्ड नंबर 1 और अवार्ड नंबर दो के तहत किए गए मुआवजे का अंतर बिना आर्बिटेशन के बराबर किया जाए। भवन मुआवजे में पूरे भवन का मुआवजा दिया जाए, जबकि एनएचएआई की ओर से उतने ही भवन का मुआवजा दिया जा रहा है, जितना फोरलेन की जद में आ रहा है, जो कि अन्यायपूर्ण है। यह प्रभावितों को अस्वीकार है। प्रथम चरण के फोरलेन प्रभावितों को भू अर्जन अधिकारी नूरपुर की ओर से अधिग्रहीत की गई भूमि और भवनों के अवार्ड पत्र भूमि और मकान का नक्शा और राशि की विस्तृत जानकारी प्रत्येक प्रभावित के पते पर उपलब्ध कराई जाए। भू अधिग्रहण कानून 2013 को अतिशीघ्र लागू किया जाए। भू अर्जन अधिकारी नूरपुर की ओर से प्रभावितों को जो 60 दिन का नोटिस दिया जा रहा है, उसे तब तक निरस्त किया जाए जब तक प्रथम और द्वितीय अवार्ड की राशि का अंतर पूरा नहीं किया जाता। इस अवसर पर फोरलेन समिति के अध्यक्ष दरबारी सिंह, उपाध्यक्ष सुदर्शन शर्मा, सचिव बीपी बक्शी, डॉ. अशोक शर्मा, कर्नल दीपक पठानिया आदि मौजूद थे।
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