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शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में माता की रसोई में लगी आग से चिमनी हुई खराब
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ज्वालामुखी मंदिर की मता की रसोई की चिमनी में लगी आग ।
- फोटो : Kangra
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। विश्वविख्यात शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर परिसर में वीरवार दोपहर आरती के दौरान माता की रसोई में आग लगने से अफरातफरी मच गई। आग इतनी तेजी से भड़की कि उस पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया। रसोइये अश्विनी कुमार ने भागकर जान बचाई। कड़ी मशक्कत के बाद मंदिर कर्मचारियों ने आग पर काबू पाया और इसकी जानकारी मंदिर अधिकारी को दी। आग लगने से चिमनी खराब हो गई। आग के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि यदि कर्मचारी सक्रियता न दिखाते तो रसोईये के साथ अनहोनी हो सकती थी। बताया जा रहा है कि इतना बड़ा हादसा मंदिर में पहले कभी नहीं हुआ है। इसी के चलते मंदिर के रसोइयों अशोक कुमार और बंटी ने मंदिर प्रशासन को लिख कर दिया है कि मौजूदा रसोई में काम करना बहुत मुश्किल है। यहां पर कर्मचारियों का दम घुटता है और यह रसोई किसी भी लिहाज से काम करने के लायक नहीं है। इसलिए पुरानी रसोई जो हर लिहाज से बेहतर है, वहां पर माता की रसोई बनाई जाए।
पुजारी महासभा ज्वालामुखी के अध्यक्ष अविनेंद्र शर्मा व पुजारी संदीप कुमार, शैलेंद्र, सुरेंद्र व पंकज आदि ने बताया कि पुरानी रसोई हर लिहाज से बेहतर है। वहां पर जगह भी ज्यादा है और रसोइयों को काम करना भी बेहतर लगता है। जो नई रसोई बनाई गई है, वहां पर दम घुटता है और सुरक्षा की दृष्टि से किसी भी लिहाज से सुरक्षित नहीं है। गौरतलब है कि माता की रसोई में माता के लिए प्रसाद बनाया जाता है।
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उधर, मंदिर अधिकारी तहसीलदार दीनानाथ यादव ने बताया कि उन्हें इस घटना के बारे में पता चला है। पुजारी वर्ग के लोगों से संपर्क करके रसोई को कहां चलाना है, इस बारे में शीघ्र ही निर्णय लिया जाएगा। आग लगने के कारणों का पता लगाया जाएगा। उधर, विधायक एवं राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला ने कहा कि मंदिर की रसोई में यदि ऐसी घटना हुई है तो यह बेहद चिंताजनक है। मंदिर प्रशासन को चाहिए कि जहां पर कर्मचारी सुरक्षित हैं, वहां पर ही रसोई बनाई जाए। यदि किसी प्रकार की कोई अनहोनी होती है तो मंदिर प्रशासन उसका जिम्मेवार होगा।
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प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि यदि कर्मचारी सक्रियता न दिखाते तो रसोईये के साथ अनहोनी हो सकती थी। बताया जा रहा है कि इतना बड़ा हादसा मंदिर में पहले कभी नहीं हुआ है। इसी के चलते मंदिर के रसोइयों अशोक कुमार और बंटी ने मंदिर प्रशासन को लिख कर दिया है कि मौजूदा रसोई में काम करना बहुत मुश्किल है। यहां पर कर्मचारियों का दम घुटता है और यह रसोई किसी भी लिहाज से काम करने के लायक नहीं है। इसलिए पुरानी रसोई जो हर लिहाज से बेहतर है, वहां पर माता की रसोई बनाई जाए।
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पुजारी महासभा ज्वालामुखी के अध्यक्ष अविनेंद्र शर्मा व पुजारी संदीप कुमार, शैलेंद्र, सुरेंद्र व पंकज आदि ने बताया कि पुरानी रसोई हर लिहाज से बेहतर है। वहां पर जगह भी ज्यादा है और रसोइयों को काम करना भी बेहतर लगता है। जो नई रसोई बनाई गई है, वहां पर दम घुटता है और सुरक्षा की दृष्टि से किसी भी लिहाज से सुरक्षित नहीं है। गौरतलब है कि माता की रसोई में माता के लिए प्रसाद बनाया जाता है।
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उधर, मंदिर अधिकारी तहसीलदार दीनानाथ यादव ने बताया कि उन्हें इस घटना के बारे में पता चला है। पुजारी वर्ग के लोगों से संपर्क करके रसोई को कहां चलाना है, इस बारे में शीघ्र ही निर्णय लिया जाएगा। आग लगने के कारणों का पता लगाया जाएगा। उधर, विधायक एवं राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला ने कहा कि मंदिर की रसोई में यदि ऐसी घटना हुई है तो यह बेहद चिंताजनक है। मंदिर प्रशासन को चाहिए कि जहां पर कर्मचारी सुरक्षित हैं, वहां पर ही रसोई बनाई जाए। यदि किसी प्रकार की कोई अनहोनी होती है तो मंदिर प्रशासन उसका जिम्मेवार होगा।