फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kangra News ›   Fiber will be made from Vyul-Rambaan, one thousand colors from weed

Kangra News: ब्यूल-रानवाण से बनेगा रेशा, खरपतवार से एक हजार रंग

Thu, 14 Aug 2025 09:01 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Thu, 14 Aug 2025 09:01 AM IST
विज्ञापन
Fiber will be made from Vyul-Rambaan, one thousand colors from weed
कृषि विवि पालमपुर में रेशे से बनाए उत्पाद और उनमें इस्तेमाल किया गया रंग। -स्रोत : संस्थान
पालमपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने एक ऐसा शोध पूरा किया है जो आने वाले समय में हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के वस्त्र एवं परिधान डिजाइनिंग विभाग ने पेड़ों और खरपतवार पौधों से रेशा और प्राकृतिक रंग बनाने की तकनीक विकसित की है।
विज्ञापन

इस तकनीक से न केवल वस्त्र उद्योग में नई संभावनाएं खुलेंगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीण इलाकों में पाए जाने वाले ब्यूल (ग्रीविया), रानवाण और अलसी के पौधों से उच्च गुणवत्ता वाला रेशा तैयार करने की तकनीक विकसित की गई है। इस रेशे का उपयोग रेशमी कपड़े, मैट और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद बनाने में किया जा सकता है। ये पौधे भूमि कटाव रोकने में भी सहायक होते हैं, जिससे यह खेती किसानों के लिए दोहरा लाभ दे सकती है।
विज्ञापन

शोध में लीची के पत्तों, कसमल की जड़ों, काली बसूंटी और लंब जैसे खरपतवार पौधों से लगभग एक हजार रंगों के शेड तैयार किए गए हैं। ये रंग पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण-हितैषी हैं, जो वस्त्र उद्योग में रसायनों के स्थान पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इस तकनीक को टेक्सटाइल कंपनियां या उद्यमी विश्वविद्यालय से ले सकते हैं। जैविक और प्राकृतिक वस्त्र उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने के चलते किसानों के लिए यह नई खेती आय का एक मजबूत स्रोत बन सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हमने व्यूल, रानवाण और अलसी के पौधों से रेशा तैयार करने की तकनीक विकसित की है। इसके अलावा लीची के पत्तों, कसमल की जड़ों और अन्य खरपतवारों से एक हजार से अधिक प्राकृतिक रंगों के शेड तैयार किए हैं। यह शोध पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभकारी है। -डॉ. सपना गौतम, विभागाध्यक्ष, वस्त्र एवं परिधान डिजाइनिंग

प्राकृतिक पेड़ों से रेशा और लीची के पतों समेत अन्य खरपतवारों से प्राकृतिक रंगों की तकनीकी विकसित की है। यह तकनीक पूरी तरह प्राकृतिक है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी। टेक्सटाइल कंपनियां या उद्यमी इसे विश्वविद्यालय से ले सकते हैं। इससे प्राकृतिक वस्त्र उत्पादन को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी। -प्रो. नवीन कुमार, कुलपति, कृषि विवि पालमपुर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed