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गेहूं बीजने से पहले उपचारित करें किसान : विशेषज्ञ
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पालमपुर (कांगड़ा)। इस माह होने वाले कृषि कार्यों को लेकर कृषि विवि पालमपुर के विशेषज्ञों ने किसानों के लिए सलाह जारी की है। इसमें कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि प्रदेश के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों के सिंचित एवं असिंचित क्षेत्रों में अक्तूबर के पहले पखवाड़े में गेहूं की अगेती किस्म एचएस-542, एचपीडब्ल्यू-360, एवं वी गेहूं के बीज को बिजाई से पहले फफूंदनाशक बैविस्टिन 2.5 ग्राम या वीटावैक्स 2.5 ग्राम या रैक्सिल 1.0 से उपचारित करें।
अच्छे जल निकास वाली दोमट तथा रेतीली भूमि चने की खेती के लिए उत्तम है। इसकी खेती के लिए जमीन थोड़ी ढेलों वाली होनी चाहिए, जिससे जड़ों में हवा अच्छी तरह प्रवेश कर सके। चने की बिजाई का मुख्य समय मध्य अक्तूबर है। चने की उन्नत किस्मों में हिमाचल चना-1, हिमाचल चना-2, जीपीएफ-2 या एचपीजी-17 उन्नत किस्में हैं। बिजाई से पूर्व बीज को फफूंदनाशक बैविस्टिन 1.5 ग्राम प्लस थीरम 1.5 ग्राम से उपचार अवश्य करें। जीपीएफ-2, हिमाचल चना-2 व हिमाचल चना-1 किस्मों को लाइन में 30 सेंटीमीटर व एचपीजी-17 किस्मों को 50 सेंटीमीटर की दूरी पर बिजाई करनी चाहिए।
कृषि विवि के कुलपति डॉ. एके पांडा ने कहा कि राया तिलहनी फसल है। इसे निचले पर्वतीय क्षेत्रों में शुद्ध एवं गेहूं के साथ मिश्रित खेती के साथ बीजा जाता है। फसल को बारानी तथा सिंचित दोनों परिस्थितियों में उगाया जा सकता है।
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चाईनीज बंदगोभी की पौध की रोपाई 45 एवं 30 सेंटीमीटर की दूरी पर करें। पालक, मेथी, धनिया, मूली, गाजर व शलजम की भी बिजाई इस पखवाड़े में करें। मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में फूलगोभी, बंदगोभी, गांठगोभी, चाईनीज बंदगोभी और ब्रोकली की तैयार पौध की रोपाई करें।
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अच्छे जल निकास वाली दोमट तथा रेतीली भूमि चने की खेती के लिए उत्तम है। इसकी खेती के लिए जमीन थोड़ी ढेलों वाली होनी चाहिए, जिससे जड़ों में हवा अच्छी तरह प्रवेश कर सके। चने की बिजाई का मुख्य समय मध्य अक्तूबर है। चने की उन्नत किस्मों में हिमाचल चना-1, हिमाचल चना-2, जीपीएफ-2 या एचपीजी-17 उन्नत किस्में हैं। बिजाई से पूर्व बीज को फफूंदनाशक बैविस्टिन 1.5 ग्राम प्लस थीरम 1.5 ग्राम से उपचार अवश्य करें। जीपीएफ-2, हिमाचल चना-2 व हिमाचल चना-1 किस्मों को लाइन में 30 सेंटीमीटर व एचपीजी-17 किस्मों को 50 सेंटीमीटर की दूरी पर बिजाई करनी चाहिए।
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कृषि विवि के कुलपति डॉ. एके पांडा ने कहा कि राया तिलहनी फसल है। इसे निचले पर्वतीय क्षेत्रों में शुद्ध एवं गेहूं के साथ मिश्रित खेती के साथ बीजा जाता है। फसल को बारानी तथा सिंचित दोनों परिस्थितियों में उगाया जा सकता है।
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चाईनीज बंदगोभी की पौध की रोपाई 45 एवं 30 सेंटीमीटर की दूरी पर करें। पालक, मेथी, धनिया, मूली, गाजर व शलजम की भी बिजाई इस पखवाड़े में करें। मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में फूलगोभी, बंदगोभी, गांठगोभी, चाईनीज बंदगोभी और ब्रोकली की तैयार पौध की रोपाई करें।