{"_id":"6a143ac3cff183f8030cdff5","slug":"convict-sentenced-to-six-months-imprisonment-in-cheque-bounce-case-kangra-news-c-95-1-kng1004-236323-2026-05-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: चेक बाउंस मामले में दोषी को छह माह की कारावास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: चेक बाउंस मामले में दोषी को छह माह की कारावास
Tue, 26 May 2026 05:33 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 26 May 2026 05:33 AM IST
विज्ञापन
धर्मशाला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कांगड़ा अनीता शर्मा की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक और आर्थिक परेशानी के एवज में 5 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश भी जारी किए हैं।
अदालत में दायर शिकायत के अनुसार आरोपी ने वर्ष 2021 में अपनी व्यक्तिगत जरूरत बताते हुए शिकायतकर्ता से 2.50 लाख रुपये उधार लिए थे। तय समय बीत जाने के बाद भी जब आरोपी ने राशि वापस नहीं की तो शिकायतकर्ता ने बार-बार अपने पैसे मांगे। इस पर आरोपी ने भुगतान के लिए ढाई लाख रुपये का एक चेक जारी कर दिया।
शिकायतकर्ता ने जब इस चेक को अपने बैंक खाते में लगाया तो आरोपी के हस्ताक्षर मेल न खाने (सिग्नेचर मिसमैच) के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने विधिक (कानूनी) नोटिस भी भेजा, लेकिन आरोपी ने निर्धारित समय के भीतर कोई भुगतान नहीं किया। मामले की नियमित सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का कोई प्रभावी खंडन नहीं कर सका।
विज्ञापन
यही नहीं, वह अपने बचाव में अदालत के समक्ष कोई ठोस साक्ष्य या सबूत भी प्रस्तुत करने में पूरी तरह नाकाम रहा। अदालत ने मामले से जुड़े सभी गवाहों और तथ्यों को जांचने के बाद शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने के आदेश जारी कर दिए।
विज्ञापन
अदालत में दायर शिकायत के अनुसार आरोपी ने वर्ष 2021 में अपनी व्यक्तिगत जरूरत बताते हुए शिकायतकर्ता से 2.50 लाख रुपये उधार लिए थे। तय समय बीत जाने के बाद भी जब आरोपी ने राशि वापस नहीं की तो शिकायतकर्ता ने बार-बार अपने पैसे मांगे। इस पर आरोपी ने भुगतान के लिए ढाई लाख रुपये का एक चेक जारी कर दिया।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता ने जब इस चेक को अपने बैंक खाते में लगाया तो आरोपी के हस्ताक्षर मेल न खाने (सिग्नेचर मिसमैच) के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने विधिक (कानूनी) नोटिस भी भेजा, लेकिन आरोपी ने निर्धारित समय के भीतर कोई भुगतान नहीं किया। मामले की नियमित सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का कोई प्रभावी खंडन नहीं कर सका।
विज्ञापन
यही नहीं, वह अपने बचाव में अदालत के समक्ष कोई ठोस साक्ष्य या सबूत भी प्रस्तुत करने में पूरी तरह नाकाम रहा। अदालत ने मामले से जुड़े सभी गवाहों और तथ्यों को जांचने के बाद शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने के आदेश जारी कर दिए।